ॐ जय जगदीश हरे, विष्णु जी की आरती
शायद ही कोई भारतीय घर हो जहां यह आरती न सुनी गई हो। “ॐ जय जगदीश हरे” भारत की सबसे लोकप्रिय आरतियों में से एक है, जो भगवान विष्णु को समर्पित है। किसी भी पूजा, हवन या शुभ अवसर के अंत में यह आरती लगभग अनिवार्य रूप से गाई जाती है।
आरती में क्या वर्णन है
इस आरती में भगवान विष्णु को जगत का पालनहार, सबके दुखों को हरने वाला और भक्तों की हर विपत्ति में सहायता करने वाला बताया गया है। आरती में भक्त अपनी विभिन्न कमियों और कठिनाइयों का ज़िक्र करते हुए भगवान से करुणा और कृपा की प्रार्थना करते हैं, चाहे वह ज्ञान की कमी हो, भक्ति में कमी हो, या जीवन की कोई और चुनौती।
आरती का भाव
यह आरती बहुत ही सरल भाषा में भगवान से सीधा संवाद जैसी लगती है, मानो भक्त अपने सबसे आत्मीय व्यक्ति से अपनी व्यथा कह रहा हो। यही सरलता और आत्मीयता इस आरती को इतना लोकप्रिय बनाती है कि यह भाषा, प्रांत और संप्रदाय की सीमाओं से परे, पूरे भारत में एक समान श्रद्धा से गाई जाती है। यह किसी भी देवता की पूजा के अंत में भी गाई जा सकती है, क्योंकि इसमें भगवान को समग्र रूप से जगदीश (जगत के स्वामी) के रूप में संबोधित किया गया है।
कब गाई जाती है
यह आरती एकादशी, वैकुण्ठ चतुर्दशी, तुलसी विवाह, सत्यनारायण पूजा, तथा किसी भी सामान्य पूजा या हवन के समापन पर गाई जाती है। कई घरों में रोज़ शाम की आरती में भी इसे शामिल किया जाता है, चाहे मुख्य पूजा किसी भी देवता की हो रही हो।
इस अनुष्ठान एवं दैनिक साधना हेतु आवश्यक प्रामाणिक सामग्री
कर्मकांडी आचार्यों के परामर्श अनुसार पूजा-पाठ में केवल शुद्ध धातु के पात्र एवं प्रामाणिक धर्मग्रंथों का ही उपयोग करना चाहिए:
Leave a Reply