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रुद्राभिषेक पूजा विधि, सामग्री एवं मंत्र

✍️ लेखक: पंडित शिवम तिवारी
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रुद्राभिषेक पूजा विधि, सामग्री एवं मंत्र
🔱 भगवान शिव

रुद्राभिषेक पूजा विधि, सामग्री एवं मंत्र

पूजा विधि · संपूर्ण विधि, अभिषेक द्रव्य एवं मंत्र सहित

रुद्राभिषेक भगवान शिव की सबसे शक्तिशाली पूजा विधियों में से एक मानी जाती है। “रुद्र” भगवान शिव का ही एक रूप है, और “अभिषेक” का अर्थ है स्नान कराना। विभिन्न पवित्र द्रव्यों से शिवलिंग का अभिषेक करके भगवान शिव को प्रसन्न करने की यह विधि, सोमवार, महाशिवरात्रि और श्रावण मास में विशेष रूप से की जाती है।

रुद्राभिषेक शिवलिंग

पूजा से पहले की तैयारी

  • सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें, संभवतः सफेद या पीले रंग के।
  • शिवलिंग को साफ स्थान पर स्थापित करें, या मंदिर में अभिषेक की व्यवस्था करें।
  • सोमवार, प्रदोष व्रत या महाशिवरात्रि का दिन सबसे शुभ माना जाता है।
  • अभिषेक के सभी द्रव्य पहले से तैयार करके पास रख लें।

आवश्यक सामग्री (अभिषेक द्रव्य)

  • शुद्ध जल, मुख्य अभिषेक के लिए, गंगाजल हो तो उत्तम
  • कच्चा दूध
  • दही
  • शहद
  • घी
  • शक्कर या मिश्री
  • गन्ने का रस (यदि उपलब्ध हो)
  • बेलपत्र, शिव जी को अत्यंत प्रिय
  • धतूरा एवं आक के फूल (यदि परंपरा में हों)
  • भस्म (विभूति)
  • चंदन, अक्षत, सफेद फूल
  • धूप, दीप, कपूर

पूजा विधि

  1. संकल्प लें, हाथ में जल और अक्षत लेकर अभिषेक का उद्देश्य बोलें।
  2. शिवलिंग की सफाई करें, स्वच्छ जल से शिवलिंग को पहले धो लें।
  3. जलाभिषेक करें, शुद्ध जल की धारा से शिवलिंग पर अभिषेक करें, “ॐ नमः शिवाय” का जाप करते हुए।
  4. दुग्धाभिषेक करें, कच्चे दूध से अभिषेक करें।
  5. दही, शहद, घी और शक्कर से अभिषेक करें, एक-एक करके हर द्रव्य से अभिषेक करते हुए मंत्र जाप जारी रखें।
  6. पुनः जल से स्नान कराएं, सभी द्रव्यों के बाद शुद्ध जल से शिवलिंग को स्वच्छ करें।
  7. बेलपत्र एवं फूल अर्पित करें, बेलपत्र की तीन पत्तियों वाली शाखा शिव जी को विशेष प्रिय है।
  8. चंदन एवं भस्म लगाएं, शिवलिंग पर चंदन और भस्म का तिलक करें।
  9. धूप-दीप दिखाएं
  10. रुद्राष्टक या शिव मंत्रों का पाठ करें
  11. आरती करें, ॐ जय शिव ओंकारा आरती के साथ।
  12. प्रसाद वितरण करें
बेलपत्र शिव पूजा

मंत्र

ॐ नमः शिवाय
ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥

ध्यान रखने योग्य बातें

  • शिव पूजा में तुलसी पत्र और केतकी का फूल वर्जित माना जाता है।
  • अभिषेक के दौरान शांत और एकाग्र मन रखें, जल्दबाज़ी न करें।
  • यदि सभी द्रव्य उपलब्ध न हों, तो केवल शुद्ध जल से भी श्रद्धापूर्वक अभिषेक किया जा सकता है, भाव सबसे महत्वपूर्ण है।
  • महारुद्राभिषेक जैसी बड़ी विधि के लिए किसी अनुभवी पंडित जी का मार्गदर्शन लेना उचित रहता है।
महत्व: रुद्राभिषेक से मानसिक शांति, स्वास्थ्य लाभ, और जीवन की बाधाओं से मुक्ति मिलती है, ऐसी मान्यता है। यह विधि विशेष रूप से उन लोगों के लिए भी की जाती है जो किसी ग्रह दोष, स्वास्थ्य समस्या या जीवन में लगातार आ रही बाधाओं से गुज़र रहे हों।
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