त्वरित दर्शन (संक्षिप्त उत्तर)
वर्ष 2026 में करवा चौथ का पावन व्रत गुरुवार, 29 अक्टूबर 2026 को रखा जाएगा। कार्तिक कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि का प्रारंभ 28 अक्टूबर 2026 की रात्रि 11:42 बजे से होकर 29 अक्टूबर 2026 की रात्रि 09:54 बजे तक रहेगा। करवा चौथ पूजा का सर्वश्रेष्ठ शुभ मुहूर्त 29 अक्टूबर की शाम 05:46 बजे से शाम 07:02 बजे तक (अवधि: 1 घंटा 16 मिनट) रहेगा। इस दिन रात्रि में चंद्रोदय का संभावित समय 08:14 बजे (दिल्ली समयानुसार) रहेगा।
1. करवा चौथ 2026 पंचांग एवं त्रि-बिंदु मुहूर्त सारणी (Panchang & Muhurat)
स्कंद पुराण एवं धर्मसिंधु के मतानुसार, करवा चौथ का व्रत उस दिन किया जाता है जिस दिन प्रदोष काल और चंद्रोदय व्यापिनी चतुर्थी तिथि विद्यमान हो। वर्ष 2026 में 29 अक्टूबर को यह संयोग पूर्ण रूप से घटित हो रहा है।
| पंचांग घटक (Panchang Element) | विवरण (वर्ष 2026) | शास्त्रीय संदर्भ / टिप्पणी |
|---|---|---|
| व्रत की तिथि | 29 अक्टूबर 2026, गुरुवार | कार्तिक मास, कृष्ण पक्ष, चतुर्थी |
| चतुर्थी तिथि प्रारंभ | 28 अक्टूबर 2026, रात्रि 11:42 बजे | पंचांग गणना आरंभ |
| चतुर्थी तिथि समाप्त | 29 अक्टूबर 2026, रात्रि 09:54 बजे | इसके पश्चात पंचमी तिथि लगेगी |
| करवा चौथ मुख्य पूजा मुहूर्त | शाम 05:46 से शाम 07:02 बजे तक | प्रदोष काल व्यापिनी शुभ वेला (1 घंटा 16 मिनट) |
| अमृत चौघड़िया मुहूर्त | शाम 05:46 से शाम 07:22 बजे तक | अति शुभ एवं कार्य सिद्धि प्रदाता |
| राहुकाल (पूजा में वर्जित समय) | दोपहर 01:28 से दोपहर 02:52 बजे तक | इस समय पूजा या संकल्प न करें |
| नक्षत्र एवं शुभ योग | मृगशिरा नक्षत्र एवं वरीयान योग | अखंड सौभाग्य एवं दांपत्य सुख वर्धक |
“करवा चौथ के दिन राहुकाल दोपहर 01:28 से 02:52 बजे तक रहेगा। इस समयावधि में भूलकर भी व्रत का संकल्प, सरगी का कोई अवशेष ग्रहण, या पूजा सामग्री की खरीदारी न करें। पूजा की संपूर्ण तैयारी शाम 05:30 बजे से पूर्व ही संपन्न कर लें ताकि आप प्रदोष काल के अमृत मुहूर्त (शाम 05:46 से 07:02) में पूर्ण एकाग्रता से मां करवा, भगवान शिव और माता पार्वती का अर्चन कर सकें।”
2. भारत के प्रमुख नगरों में चंद्रोदय समय (City-Wise Moonrise Timings Table)
चंद्रमा के दर्शन और अर्घ्य के उपरांत ही करवा चौथ का व्रत पूर्ण होता है। देश के विभिन्न भौगोलिक अक्षांशों के कारण चंद्रोदय के समय में भिन्नता होती है:
| राज्य / शहर | चंद्रोदय का सटीक समय (29 अक्टूबर 2026) |
|---|---|
| नई दिल्ली एवं NCR | रात्रि 08:14 बजे |
| जयपुर (राजस्थान) | रात्रि 08:22 बजे |
| लखनऊ / अयोध्या (उत्तर प्रदेश) | रात्रि 08:02 बजे |
| वाराणसी (काशी) | रात्रि 07:56 बजे |
| पटना (बिहार) | रात्रि 07:49 बजे |
| मुंबई (महाराष्ट्र) | रात्रि 08:52 बजे |
| पुणे (महाराष्ट्र) | रात्रि 08:48 बजे |
| इंदौर / उज्जैन (मध्य प्रदेश) | रात्रि 08:30 बजे |
| भोपाल (मध्य प्रदेश) | रात्रि 08:24 बजे |
| कोलकाता (पश्चिम बंगाल) | रात्रि 07:41 बजे |
| चंडीगढ़ / लुधियाना (पंजाब) | रात्रि 08:11 बजे |
| अहमदाबाद (गुजरात) | रात्रि 08:44 बजे |
| बेंगलुरु (कर्नाटक) | रात्रि 08:46 बजे |
| हैदराबाद (तेलंगाना) | रात्रि 08:33 बजे |
(नोट: यदि आपके क्षेत्र में बादलों अथवा कोहरे के कारण चंद्रमा स्पष्ट न दिखाई दे, तो अपने स्थानीय चंद्रोदय समय के पश्चात चंद्रमा की उदित होने की दिशा में मुख करके रोहिणी नक्षत्र और शिव परिवार का स्मरण करते हुए अर्घ्य प्रदान कर व्रत संपन्न कर सकते हैं।)
3. करवा चौथ व्रत की सरगी: नियम, समय एवं सात्विक आहार
सरगी सास द्वारा अपनी बहू को दिया जाने वाला आशीर्वाद और प्रीति-भेंट है। यह केवल एक परंपरा नहीं, अपितु पूरे दिन निर्जला उपवास के लिए आध्यात्मिक और शारीरिक ऊर्जा का स्रोत है।
सरगी ग्रहण करने का शास्त्रोक्त समय
सरगी सदैव ब्रह्म मुहूर्त में, सूर्योदय से लगभग 2 घंटा पूर्व ग्रहण की जाती है।
- सरगी का शुभ समय: 29 अक्टूबर 2026, प्रातः 04:15 बजे से 05:12 बजे तक।
- प्रातः 05:30 बजे (सूर्योदय) के पश्चात अन्न या जल ग्रहण करना वर्जित है।
सरगी की थाली में क्या शामिल करें?
- ताजे फल: सेब, केला, पपीता, या अनार (जो शरीर में जल का संतुलन बनाए रखें)।
- सूखे मेवे (Dry Fruits): बादाम, काजू, किशमिश और अंजीर।
- दूध एवं मखाने की सात्विक खीर या सेवई: यह संपूर्ण दिन शीतलता और तृप्ति प्रदान करती है।
- सोलह श्रृंगार सामग्री: सिंदूर, बिंदी, मेहंदी, चूड़ियां, महावर एवं लाल चुनरी।
4. संपूर्ण करवा चौथ पूजा सामग्री सूची (Checklist)
पूजा की तैयारी के लिए सामग्री को पहले से व्यवस्थित कर लें। आप हमारी संपूर्ण वैदिक पूजा सामग्री सूची भी देख सकते हैं।
- चौकी एवं वस्त्र: लकड़ी की पाटा/चौकी, लाल या पीला नया वस्त्र, गंगाजल।
- प्रतिमा / चित्र: करवा माता का चित्र (या दीवार पर गेरू से बना चित्र), भगवान शिव, माता पार्वती, कार्तिकेय और गणेश जी की प्रतिमा।
- करवा (पात्र): दो मिट्टी या तांबे के करवे (एक में जल, दूसरे में दूध या बताशे/अन्न), करवे का ढक्कन, सींक (कम से कम 7 या 9 सींकें)।
- दीपक एवं ज्योति: शुद्ध घी का दीपक, रुई की बत्ती, छलनी (चंद्र दर्शन हेतु)।
- सुहाग सामग्री: कुमकुम, अक्षत (अखंडित चावल), हल्दी, चंदन, रोली, अबीर, गुलाल, मेहंदी, सिंदूर।
- नैवेद्य एवं भोग: घर पर बने मीठे पुए, मठरी, ऋतुफल, बताशे, कलावा (मौली), और दक्षिणा।
5. षोडशोपचार करवा चौथ पूजा विधि (Step-by-Step Ritual)
शाम को शुभ मुहूर्त (05:46 से 07:02 बजे) में शुद्ध मन से स्नान करके सुहाग के लाल अथवा पीले वस्त्र धारण करें।
चरण 1: पवित्रीकरण एवं आचमन
अपने ऊपर और पूजा सामग्री पर गंगाजल छिड़कें: $$text{ॐ अपवित्रः पवित्रो वा सर्वावस्थां गतोऽपि वा। यः स्मरेत्पुण्डरीकाक्षं स बाह्याभ्यन्तरः शुचिः॥}$$ तीन बार आचमनी से जल लेकर मुख में डालें:
- *ॐ केशवाय नमः*
- *ॐ नारायणाय नमः*
- *ॐ माधवाय नमः* (चौथी बार हाथ धो लें – *ॐ गोविंदाय नमः*)
चरण 2: व्रत संकल्प
हाथ में अक्षत, पुष्प, जल और एक सिक्का लेकर संकल्प लें: $$text{मम सर्वसौभाग्यसुखसमृद्धिवृद्धये, मम पत्युः आयुष्य, आरोग्य, ऐश्वर्यसिद्धये च करिष्ये अमुक गोत्रोत्पन्ना अहं करवा चौथ व्रतमहं करिष्ये।}$$
चरण 3: गौरी-गणेश एवं शिव परिवार की स्थापना
चौकी पर लाल वस्त्र बिछाएं। मध्य में चावल की ढेरी बनाकर गणेश जी और शिव-पार्वती की स्थापना करें। दीवार पर करवा माता का चित्र लगाएं।
चरण 4: करवे का पूजन
करवे पर स्वास्तिक का चिह्न बनाएं। कंठ में मौली बांधें। करवे के अंदर शुद्ध जल, एक सुपारी, सिक्का और दूर्वा डालें। करवे के ऊपर रखे ढक्कन में गेहूं या बताशे रखें और उस पर घी का दीपक प्रज्वलित करें।
चरण 5: मां पार्वती एवं करवा माता को सुहाग अर्पण
माता पार्वती को सिंदूर, रोली और अक्षत अर्पित करें। इसके बाद स्वयं अपनी मांग में उसी सिंदूर से तीन बार सिंदूर लगाएं।
6. करवा चौथ व्रत कथा (Veerwati Ki Pauranik Katha)
पूजा के समय सभी सुहागिन महिलाएं एक साथ बैठकर, हाथ में 13 दाने गेहूं या चावल के लेकर एकाग्रचित्त होकर यह कथा श्रवण करती हैं:
पौराणिक काल में इंद्रप्रस्थ के एक नगर में वेदधर्मा नामक एक तपस्वी ब्राह्मण रहते थे। उनकी पत्नी लीलावती और उनके सात पुत्र तथा एक पुत्री थी, जिसका नाम वीरवती था। सातों भाइयों की वह अकेली और अत्यंत लाडली बहन थी। विवाह योग्य होने पर वीरवती का विवाह एक सुयोग्य ब्राह्मण युवक से हुआ।
विवाह के प्रथम वर्ष वीरवती अपने मायके आई हुई थी। कार्तिक कृष्ण चतुर्थी को उसने अपनी भाभियों के साथ विधिपूर्वक करवा चौथ का निर्जला व्रत रखा। वीरवती सुकोमल स्वभाव की थी, अतः पूरे दिन निर्जल रहने के कारण भूख और प्यास से वह अत्यंत व्याकुल हो गई और संध्या समय मूर्छित होकर गिर पड़ी।
यह देखकर सातों भाइयों का हृदय द्रवित हो उठा। उन्होंने वीरवती से कुछ खा लेने का आग्रह किया, किंतु धर्मपरायण वीरवती ने कहा— “हे भ्राता! मैं केवल चंद्रमा को अर्घ्य देकर ही जल ग्रहण करूंगी।”
बहन की असहनीय पीड़ा न देख पाने के कारण भाइयों ने एक युक्ति निकाली। सबसे छोटे भाई ने एक विशाल वटवृक्ष पर चढ़कर लाल रंग की छलनी के पीछे एक बड़ा दीपक रख दिया। नीचे आकर भाइयों ने कहा— “बहन! आकाश में देखो, चंद्रमा निकल आया है, तुम अर्घ्य देकर भोजन ग्रहण कर लो।”
बहन वीरवती ने भाई के प्रेम पर विश्वास करके उस कृत्रिम दीपक को ही चंद्रमा समझ लिया और अर्घ्य देकर जैसे ही भोजन का पहला ग्रास मुंह में डाला, उसे छींक आ गई। दूसरे ग्रास में बाल निकला और तीसरे ग्रास को मुख में डालते ही उसके ससुराल से समाचार आया कि उसके पति अत्यंत गंभीर रूप से अस्वस्थ होकर मृत्यु को प्राप्त हो गए हैं।
वीरवती विलाप करते हुए रोने लगी। तब साक्षात माता इंद्राणी (शची देवी) प्रकट हुईं। वीरवती ने रोते हुए पूछा— “हे देवी! मेरे किस अपराध के कारण मेरे सुहाग पर यह वज्रपात हुआ?”
इंद्राणी देवी ने कहा— “पुत्री! तुमने अपने भाइयों द्वारा दिखाए गए छल के चंद्रमा को देखकर बिना वास्तविक चंद्रोदय के व्रत खंडित कर दिया था। इसी कारण यह संकट आया है।”
वीरवती ने पश्चाताप करते हुए क्षमा मांगी। इंद्राणी ने कहा— “अब तुम पूर्ण श्रद्धा से पुनः करवा चौथ और प्रत्येक मास की चतुर्थी का व्रत नियमपूर्वक करो, भगवान शिव और माता पार्वती की कृपा से तुम्हारा पति अवश्य जीवित हो जाएगा।”
वीरवती ने पूरे वर्ष अत्यंत कठोर नियम से चतुर्थी के व्रत किए। अगले वर्ष पुनः करवा चौथ के दिन उसने विधि-विधान से निर्जला व्रत कर वास्तविक चंद्रमा को अर्घ्य दिया। माता गौरी और भगवान शिव प्रसन्न हुए और उन्होंने वीरवती के पति को पुनर्जीवित कर दिया तथा उसे अखंड सौभाग्यवती होने का वरदान दिया।
7. चंद्र दर्शन एवं अर्घ्य विधान (Moon Arghya Mantra & Parana)
रात्रि में जब चंद्रोदय हो, तब थाली में जल से भरा लोटा, कुमकुम, अक्षत, धूप, घी का दीपक और छलनी लेकर छत पर जाएं।
अर्घ्य का वैदिक मंत्र:
$$text{क्षीरोदार्णव सम्भूत अत्रिनेत्र समुद्भव।}$$ $$text{गृहाणार्घ्यं मया दत्तं रोहिण्यासहितो मम॥}$$ (हे क्षीरसागर से उत्पन्न और महर्षि अत्रि के नेत्रों से प्रकट हुए चंद्रमा! रोहिणी देवी के साथ आप मेरे द्वारा दिए गए इस अर्घ्य को स्वीकार करें और मेरे परिवार को सौभाग्य प्रदान करें।)
दर्शन का क्रम:
- सबसे पहले छलनी के माध्यम से जलते हुए दीपक की लौ में चंद्रमा के दर्शन करें।
- इसके पश्चात उसी छलनी से अपने पति का चेहरा देखें।
- पति के चरणों का स्पर्श कर आशीर्वाद लें।
- पति अपने हाथों से पत्नी को जल पिलाकर और मिष्ठान खिलाकर व्रत का पारण कराएं।
8. करवा माता एवं शिव-पार्वती आरती (Aarti)
पूजा के अंत में शुद्ध भाव से करवा माता एवं माता पार्वती की आरती करें। आप हमारी संपूर्ण आरती संग्रह में जाकर अन्य देवी-देवताओं की आरतियां भी देख सकते हैं।
करवा माता की आरती: जय करवा मैया, माता जय करवा मैया। जो व्रत करे तुम्हारा, पार करो नैया॥ ॐ जय करवा मैया… सब जग की हो माता, सब पर दया करो। अपने सुहागिन भक्तों के, सब दुःख हरण करो॥ ॐ जय करवा मैया… कार्तिक कृष्ण चतुर्थी, जो व्रत कोई गावे। पति की दीर्घायु पावे, सुख-संपत्ति पावे॥ ॐ जय करवा मैया…
9. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्र. 1: क्या अस्वस्थता या गर्भावस्था में करवा चौथ का व्रत छोड़ सकते हैं? उत्तर: हां, धर्मसिंधु के अनुसार शरीर माध्यम खलु धर्मसाधनम्। यदि गर्भवती या अस्वस्थ महिलाएं निर्जला व्रत रखने में असमर्थ हैं, तो वे जल, दूध या फलाहार लेकर व्रत रख सकती हैं अथवा अपने पति या सास से व्रत का संकल्प करा सकती हैं।
प्र. 2: यदि करवा चौथ पर चंद्रमा बादलों के कारण न दिखे तो क्या करें? उत्तर: ऐसी स्थिति में पंचांग में दिए गए अपने नगर के चंद्रोदय समय (जैसे दिल्ली में 08:14 बजे) के बाद चंद्रमा की उदित होने की पूर्व-उत्तर दिशा में मुख करके, भगवान शिव के मस्तक पर विराजमान चंद्रमा का ध्यान करते हुए अर्घ्य दें।
प्र. 3: पूजा के करवे का पानी और गेहूं का क्या करना चाहिए? उत्तर: पूजा में प्रयुक्त जल को तुलसी जी में विसर्जित न करें (क्योंकि चतुर्थी की रात्रि में तुलसी स्पर्श वर्जित है), इसे किसी अन्य पवित्र पौधे (जैसे शमी, केला या पीपल) में डालें। करवे के ऊपर रखा गेहूं और दक्षिणा अपनी सास अथवा किसी सुहागिन ब्राह्मणी को आदरपूर्वक भेंट करें।
प्र. 4: क्या कुंवारी कन्याएं भी करवा चौथ का व्रत रख सकती हैं? उत्तर: कुंवारी कन्याएं मनपसंद और सुयोग्य वर की प्राप्ति के लिए यह व्रत रख सकती हैं। वे चंद्रमा के स्थान पर तारों को अर्घ्य देकर व्रत खोलती हैं और छलनी का प्रयोग नहीं करती हैं।
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कर्मकांडी आचार्यों के परामर्श अनुसार पूजा-पाठ में केवल शुद्ध धातु के पात्र एवं प्रामाणिक धर्मग्रंथों का ही उपयोग करना चाहिए:
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