|| ॐ श्री गणेशाय नमः || सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामयाः || असतो मा सद्गमय तमसो मा ज्योतिर्गमय ||

करवा चौथ पूजा विधि, सामग्री एवं कथा

✍️ लेखक: पंडित शिवम तिवारी
📲 WhatsApp शेयर
करवा चौथ की कथा का सार
🌙 माँ पार्वती · करवा माता

करवा चौथ पूजा विधि, सामग्री एवं कथा

पूजा विधि · संपूर्ण विधि, सरगी से चंद्र दर्शन तक

करवा चौथ भारतीय विवाहित स्त्रियों के सबसे भावुक और प्रेमपूर्ण व्रतों में से एक है। इस दिन पत्नी अपने पति की लंबी आयु और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना करते हुए निर्जला व्रत रखती है, और रात को चंद्रमा को देखकर ही व्रत खोलती है।

करवा चौथ पूजा

पूजा से पहले की तैयारी

  • व्रत कार्तिक मास की चतुर्थी तिथि को रखा जाता है, कृष्ण पक्ष में।
  • सुबह सूर्योदय से पहले सरगी खाई जाती है, जो सामान्यतः सास द्वारा बहू को दी जाती है।
  • सरगी के बाद पूरे दिन निर्जला व्रत रखा जाता है, यानी बिना अन्न-जल के।
  • शाम को सुंदर श्रृंगार करें, नई या पसंदीदा साड़ी पहनें।

आवश्यक सामग्री

  • करवा (मिट्टी का छोटा घड़ा), पूजा के लिए
  • माँ पार्वती, शिव जी, गणेश जी एवं कार्तिकेय जी की तस्वीर या मूर्ति
  • चलनी (छलनी), चंद्र दर्शन के लिए
  • दीपक, धूप, रोली, अक्षत, सिंदूर
  • मिठाई एवं फल
  • जल से भरा लोटा
  • करवा चौथ की कथा की पुस्तक
  • श्रृंगार का सामान, चूड़ियां, बिंदी, मेहंदी आदि

पूजा विधि

  1. सुबह संकल्प लें, व्रत का संकल्प लेकर दिनभर निर्जला व्रत रखें।
  2. शाम को पूजा स्थान सजाएं, माँ पार्वती, शिव जी, गणेश जी और कार्तिकेय जी की स्थापना करें।
  3. करवा तैयार करें, मिट्टी के करवे में जल भरें और उसे सजाएं।
  4. सामूहिक पूजा करें, महिलाएं एक साथ बैठकर पूजा करती हैं, थाली सजाकर।
  5. करवा चौथ की कथा सुनें, पूजा के दौरान व्रत कथा अवश्य सुनें या पढ़ें।
  6. चंद्रोदय की प्रतीक्षा करें, चंद्रमा निकलने के बाद ही व्रत खोला जाता है।
  7. चलनी से चंद्र दर्शन करें, छलनी में से पहले चंद्रमा को देखें, फिर उसी छलनी से पति का चेहरा देखें।
  8. पति द्वारा जल अर्पण, पति पत्नी को जल पिलाकर और कुछ खिलाकर व्रत खुलवाते हैं।
  9. आरती करें, पूजा का समापन आरती से करें।

करवा चौथ की कथा का सार

करवा चौथ की सबसे प्रचलित कथा रानी वीरवती की है। एक बार वीरवती व्रत की भूख न सह पाईं और भाइयों के छल से समय से पहले ही चांद देखकर व्रत खोल लिया, जिससे उनके पति की मृत्यु हो गई। बाद में देवी इंद्राणी की सहायता से वीरवती ने विधिपूर्वक फिर से करवा चौथ का व्रत किया, जिससे उनके पति पुनः जीवित हो उठे। यह कथा व्रत को श्रद्धा और नियम के साथ पूरा करने के महत्व को दर्शाती है।

ध्यान रखने योग्य बातें

  • व्रत रखते समय अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखें, विशेषकर गर्भवती स्त्रियां और जिन्हें कोई स्वास्थ्य समस्या हो, वे डॉक्टर की सलाह अवश्य लें।
  • निर्जला व्रत कठिन हो तो फलाहार व्रत का विकल्प भी अपनाया जा सकता है।
  • व्रत श्रद्धा और खुशी से करें, दबाव या मजबूरी में नहीं।
महत्व: करवा चौथ केवल एक परंपरा नहीं, बल्कि पति-पत्नी के बीच प्रेम, विश्वास और एक-दूसरे की भलाई की कामना का प्रतीक है। आज के समय में कई जगह पति भी अपनी पत्नी के लिए व्रत रखकर इस भावना को और सुंदर बनाते हैं।
शास्त्रोक्त अनुष्ठान सामग्री प्रामाणिक स्रोत • गीताप्रेस गोरखपुर

इस अनुष्ठान एवं दैनिक साधना हेतु आवश्यक प्रामाणिक सामग्री

कर्मकांडी आचार्यों के परामर्श अनुसार पूजा-पाठ में केवल शुद्ध धातु के पात्र एवं प्रामाणिक धर्मग्रंथों का ही उपयोग करना चाहिए:

★ 4.9 • गीताप्रेस गोरखपुर
श्रीमद्भगवद्गीता (साधक संजीवनी)
स्वामी रामसुखदास जी टीका (₹450)
अमेज़न पर देखें ↗
★ 4.8 • हरिद्वार प्रमाणित
5-मुखी रुद्राक्ष जाप माला
108+1 मनके वैदिक जाप हेतु (₹499)
अमेज़न पर देखें ↗
शुद्ध पीतल पंचमुखी दीपक, हवन पात्र एवं गंगाजल संग्रह देखें। संपूर्ण पूजा सामग्री भंडार देखें →
पंडित दर्शन - सनातन ज्ञान केंद्र

यदि आपको यह विधि या लेख उपयोगी लगा हो, तो अपने परिजनों व मित्रों के साथ साझा करें।

📲 परिजनों को शेयर करें

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *