|| ॐ श्री गणेशाय नमः || सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामयाः || असतो मा सद्गमय तमसो मा ज्योतिर्गमय ||

रुद्राक्ष धारण करने के नियम एवं महत्व

✍️ लेखक: पंडित शिवम तिवारी
📲 WhatsApp शेयर
रुद्राक्ष धारण करने के नियम एवं महत्वरुद्राक्ष धारण करने के नियम एवं महत्व
🔱 महत्व और कारण

रुद्राक्ष धारण करने के नियम एवं महत्व

ब्लॉग · भगवान शिव के प्रिय बीज की संपूर्ण जानकारी

रुद्राक्ष का नाम सुनते ही मन में भगवान शिव की छवि उभर आती है। बहुत से लोग इसे धारण तो करते हैं, पर इसके सही नियम और महत्व के बारे में कम ही जानते हैं। आइए आज विस्तार से समझते हैं कि रुद्राक्ष क्या है, इसे कैसे धारण करें, और किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।

रुद्राक्ष क्या है

रुद्राक्ष एक विशेष प्रकार के वृक्ष का बीज है, जो मुख्यतः नेपाल, इंडोनेशिया और भारत के कुछ हिस्सों में पाया जाता है। पौराणिक मान्यता है कि भगवान शिव के आंसुओं की बूंदों से रुद्राक्ष के वृक्ष की उत्पत्ति हुई, इसीलिए इसे शिवजी का प्रिय और अत्यंत पवित्र माना जाता है।

रुद्राक्ष के प्रकार, मुखी के अनुसार

रुद्राक्ष पर प्राकृतिक रूप से रेखाएं होती हैं, जिन्हें “मुखी” कहा जाता है। एक मुखी से लेकर इक्कीस मुखी तक के रुद्राक्ष पाए जाते हैं, और हर मुखी का अपना अलग महत्व माना जाता है।

  • एक मुखी, साक्षात शिव का स्वरूप माना जाता है, अत्यंत दुर्लभ।
  • पंचमुखी, सबसे सामान्य और सर्वसुलभ, शुरुआत के लिए उपयुक्त माना जाता है।
  • तीन मुखी, अग्नि तत्व से जुड़ा माना जाता है।
  • सात मुखी, माँ लक्ष्मी से संबंधित माना जाता है।

रुद्राक्ष धारण करने के नियम

  • शुद्धता का ध्यान रखें, रुद्राक्ष धारण करने से पहले उसे गंगाजल या साफ जल से धो लें।
  • शुभ दिन चुनें, सोमवार, महाशिवरात्रि या श्रावण मास में रुद्राक्ष धारण करना विशेष शुभ माना जाता है।
  • मंत्र सहित धारण करें, “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जाप करते हुए रुद्राक्ष धारण करना पारंपरिक विधि है।
  • धागे का ध्यान रखें, रुद्राक्ष को लाल या पीले धागे में, अथवा चांदी या सोने की चेन में पिरोकर धारण किया जा सकता है।
  • नियमित सफाई करें, रुद्राक्ष को समय-समय पर साफ जल से धोते रहना चाहिए।

क्या न करें

  • रुद्राक्ष पहनकर मांस-मदिरा का सेवन उचित नहीं माना जाता।
  • शमशान या अशुद्ध स्थान पर जाते समय संभव हो तो रुद्राक्ष उतार देना चाहिए।
  • टूटे या खंडित रुद्राक्ष को धारण करना उचित नहीं माना जाता।
  • सोते समय रुद्राक्ष उतार देना बेहतर माना जाता है, विशेषकर यदि यह माला के रूप में हो।
  • रुद्राक्ष को किसी और को बिना सोचे-समझे न दें, यह व्यक्तिगत ऊर्जा से जुड़ा माना जाता है।

रुद्राक्ष कहां से लें

रुद्राक्ष हमेशा किसी विश्वसनीय स्रोत से ही लेना चाहिए, क्योंकि आजकल बाज़ार में नकली रुद्राक्ष भी मिलते हैं। असली रुद्राक्ष की पहचान के लिए किसी अनुभवी व्यक्ति या विश्वसनीय दुकान से ही खरीदारी करें।

महत्व: रुद्राक्ष धारण करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है, ऐसी मान्यता है। पर सबसे ज़्यादा ज़रूरी है श्रद्धा और नियमों का ईमानदारी से पालन, केवल आभूषण की तरह पहनना इसका उद्देश्य नहीं है।
शास्त्रोक्त अनुष्ठान सामग्री प्रामाणिक स्रोत • गीताप्रेस गोरखपुर

इस अनुष्ठान एवं दैनिक साधना हेतु आवश्यक प्रामाणिक सामग्री

कर्मकांडी आचार्यों के परामर्श अनुसार पूजा-पाठ में केवल शुद्ध धातु के पात्र एवं प्रामाणिक धर्मग्रंथों का ही उपयोग करना चाहिए:

★ 4.9 • गीताप्रेस गोरखपुर
श्रीमद्भगवद्गीता (साधक संजीवनी)
स्वामी रामसुखदास जी टीका (₹450)
अमेज़न पर देखें ↗
★ 4.8 • हरिद्वार प्रमाणित
5-मुखी रुद्राक्ष जाप माला
108+1 मनके वैदिक जाप हेतु (₹499)
अमेज़न पर देखें ↗
शुद्ध पीतल पंचमुखी दीपक, हवन पात्र एवं गंगाजल संग्रह देखें। संपूर्ण पूजा सामग्री भंडार देखें →
पंडित दर्शन - सनातन ज्ञान केंद्र

यदि आपको यह विधि या लेख उपयोगी लगा हो, तो अपने परिजनों व मित्रों के साथ साझा करें।

📲 परिजनों को शेयर करें

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *