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सरस्वती माँ की आरती, भाव एवं महत्व

✍️ लेखक: पंडित शिवम तिवारी
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सरस्वती माँ की आरती, भाव एवं महत्व
📚 माँ सरस्वती

सरस्वती माँ की आरती, भाव एवं महत्व

आरती · भाव, कहानी एवं महत्व

बसंत पंचमी हो या किसी विद्यार्थी की परीक्षा से पहले की प्रार्थना, माँ सरस्वती की आरती ज्ञान, विद्या और कला की देवी के प्रति श्रद्धा व्यक्त करने का सबसे सुंदर माध्यम है। स्कूल, कॉलेज और घरों में सरस्वती पूजा के अवसर पर यह आरती विशेष श्रद्धा से गाई जाती है।

आरती में क्या वर्णन है

माँ सरस्वती की आरतियों में उनके श्वेत वस्त्र, हाथ में वीणा, हंस वाहन और कमल पर विराजमान रूप का सुंदर वर्णन मिलता है। श्वेत रंग उनकी पवित्रता और ज्ञान की निर्मलता का प्रतीक माना जाता है। आरती में उन्हें बुद्धि, विवेक, वाणी और कला की अधिष्ठात्री देवी के रूप में स्तुति की जाती है।

आरती का भाव

इन आरतियों में भक्त माँ सरस्वती से अज्ञान का अंधकार दूर कर ज्ञान का प्रकाश देने की प्रार्थना करते हैं। चूंकि सरस्वती जी को वाणी और बुद्धि की देवी माना जाता है, विद्यार्थी विशेष रूप से परीक्षा और शिक्षा में सफलता के लिए उनकी आराधना करते हैं। संगीत, नृत्य और साहित्य से जुड़े लोग भी अपनी कला में निपुणता के लिए उन्हें स्मरण करते हैं।

बसंत पंचमी का विशेष महत्व

माघ मास की पंचमी तिथि को बसंत पंचमी के रूप में मनाया जाता है, जो माँ सरस्वती का प्राकट्य दिवस माना जाता है। इस दिन विशेष रूप से स्कूलों और घरों में सरस्वती पूजा की जाती है, बच्चों को अक्षर ज्ञान (विद्यारंभ संस्कार) कराया जाता है, और पीले वस्त्र तथा पीले भोग का विशेष महत्व होता है, क्योंकि यह ऋतु परिवर्तन और नई शुरुआत का भी प्रतीक है।

आरती के पूरे बोल कहां मिलेंगे: संगीत रचना होने के कारण हम यहां आरती के संपूर्ण बोल नहीं दे पा रहे, कृपया इसे अपने घर की पूजा-पुस्तक, विद्यालय में उपलब्ध आरती संग्रह, या किसी भरोसेमंद संगीत ऐप से सुनकर सीखें।
कब गाएं: बसंत पंचमी, विद्यारंभ संस्कार, परीक्षा से पहले, या किसी भी शिक्षा या कला से जुड़े शुभ अवसर पर यह आरती गाना विशेष फलदायी माना जाता है।
शास्त्रोक्त अनुष्ठान सामग्री प्रामाणिक स्रोत • गीताप्रेस गोरखपुर

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