|| ॐ श्री गणेशाय नमः || सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामयाः || असतो मा सद्गमय तमसो मा ज्योतिर्गमय ||

जय गणेश आरती

✍️ लेखक: पंडित शिवम तिवारी
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🐘 भगवान गणेश

जय गणेश आरती

आरती · संपूर्ण हिंदी पाठ एवं अर्थ सहित

यह आरती लगभग हर घर में सुनी जाती है। गणपति स्थापना हो, बुधवार का दिन हो या कोई भी शुभ अवसर, इस आरती के बिना पूजा अधूरी लगती है। बचपन से हम सब इसे गुनगुनाते आए हैं, और इसके बोल इतने सरल हैं कि बच्चे भी आसानी से याद कर लेते हैं।

गणेश आरती
आरती का समय, दीये की रोशनी में

आरती के बोल

हिंदी

जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती पिता महादेवा॥

एक दंत दयावंत चार भुजा धारी।
मस्तक सिंदूर सोहे मूसे की सवारी॥
जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा…

पान चढ़े फूल चढ़े और चढ़े मेवा।
लड्डुअन का भोग लगे संत करें सेवा॥
जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा…

अंधन को आँख देत कोढ़िन को काया।
बांझन को पुत्र देत निर्धन को माया॥
जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा…

सूर श्याम शरण आए सफल कीजे सेवा।
माता जाकी पार्वती पिता महादेवा॥
जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा॥

Transliteration

Jai Ganesh, Jai Ganesh, Jai Ganesh Deva.
Mata Jaki Parvati, Pita Mahadeva.

Ek Dant Dayavant, Char Bhuja Dhari.
Mastak Sindoor Sohe, Muse Ki Sawari.
Jai Ganesh, Jai Ganesh, Jai Ganesh Deva…

Paan Chadhe Phool Chadhe, Aur Chadhe Mewa.
Ladduan Ka Bhog Lage, Sant Karen Seva.
Jai Ganesh, Jai Ganesh, Jai Ganesh Deva…

Andhan Ko Aankh Det, Kodhin Ko Kaya.
Banjhan Ko Putra Det, Nirdhan Ko Maya.
Jai Ganesh, Jai Ganesh, Jai Ganesh Deva…

Sur Shyam Sharan Aaye, Safal Kije Seva.
Mata Jaki Parvati, Pita Mahadeva.
Jai Ganesh, Jai Ganesh, Jai Ganesh Deva.

अर्थ और भाव

इस आरती में गणेश जी की स्तुति की गई है, जो पार्वती माता और महादेव के पुत्र हैं। इसमें बताया गया है कि गणेश जी दयावान हैं, उनके एक दांत है, चार भुजाएं हैं और वे मूषक की सवारी करते हैं। आरती में यह भी कहा गया है कि गणेश जी अंधों को आंख, कोढ़ियों को नया शरीर, निःसंतान को पुत्र और निर्धन को धन देने वाले हैं, यानी वे हर किसी की मनोकामना पूर्ण करने वाले देवता हैं।

कब गाएं: गणेश चतुर्थी, बुधवार, किसी भी पूजा के अंत में, या घर में नई शुरुआत करते समय यह आरती गाना शुभ माना जाता है।
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