गणेश पूजा विधि, सामग्री और मंत्र
हमारे घर में जब भी कोई नया काम शुरू होता है, चाहे वो नई दुकान हो, नई गाड़ी हो या कोई त्यौहार, सबसे पहले गणेश जी की पूजा होती है। बड़े बुज़ुर्ग कहते हैं कि गणेश जी को सबसे पहले याद करने से रास्ते की सारी रुकावटें अपने आप हट जाती हैं। यह विधि हमारे घर में पीढ़ियों से चली आ रही है, और इसे कोई भी घर पर आसानी से कर सकता है।
पूजा शुरू करने से पहले
पूजा में जल्दबाज़ी करने से मन शांत नहीं रहता, इसलिए पहले से थोड़ी तैयारी कर लेना अच्छा रहता है।
- नहाकर साफ कपड़े पहन लें, हो सके तो नए या धुले हुए।
- पूजा वाली जगह को गंगाजल या साफ पानी से पोंछ लें।
- सुबह का समय सबसे अच्छा माना जाता है, पर जो समय आपके लिए सुविधाजनक हो वही सही है।
- गणेश जी की मूर्ति का मुख पूर्व या उत्तर दिशा में रखें।
- पूजा करने वाला व्यक्ति भी उसी दिशा की तरफ मुख करके बैठे।
- सारी सामग्री पहले से पास में रख लें, ताकि बीच में उठना न पड़े।
क्या क्या चाहिए
हर चीज़ का अपना एक मतलब होता है, इसलिए नीचे हर सामान के साथ थोड़ा बता भी दिया है कि वो क्यों रखा जाता है।
- गणेश जी की मूर्ति या फोटो, मिट्टी की मूर्ति सबसे शुभ मानी जाती है।
- लाल कपड़ा, मूर्ति के नीचे बिछाने के लिए।
- दूर्वा घास, इक्कीस पत्तियां, गणेश जी को यह बहुत प्रिय है, इसके बिना पूजा अधूरी मानी जाती है।
- लाल फूल, खासकर गुड़हल, और साथ में कुछ और ताज़े फूल।
- मोदक या लड्डू, गणेश जी का पसंदीदा भोग।
- सिंदूर और रोली, तिलक के लिए।
- अक्षत, यानी साबुत चावल, टूटे हुए नहीं होने चाहिए।
- पंचामृत, दूध, दही, घी, शहद और शक्कर मिलाकर, अभिषेक के लिए।
- धूप और अगरबत्ती
- घी का दीया
- पान का पत्ता और सुपारी
- नारियल, पूजा के अंत में चढ़ाने के लिए।
- कलश में साफ पानी
पूजा कैसे करें
अब बारी आती है असली विधि की। घबराने की ज़रूरत नहीं, बस हर कदम को शांति से करते जाएं।
- संकल्प लें, हाथ में जल, अक्षत और फूल लेकर मन में बोलें कि आज किस उद्देश्य से पूजा कर रहे हैं।
- गणपति की स्थापना करें, मूर्ति को लाल कपड़े पर रखें।
- आवाहन करें, हाथ जोड़कर गणेश जी को पूजा में आने का निमंत्रण दें।
- आसन अर्पित करें, यानी लाल कपड़ा या आसन चढ़ाएं।
- पैर धुलाने का भाव करें, थोड़ा जल चरणों में अर्पित करें।
- आचमन कराएं, शुद्धि के लिए फिर से थोड़ा जल चढ़ाएं।
- पंचामृत से स्नान कराएं, दूध, दही, घी, शहद, शक्कर, बारी बारी से।
- साफ पानी से स्नान कराएं और फिर एक साफ कपड़े से पोंछ दें।
- वस्त्र चढ़ाएं, लाल कपड़ा अर्पित करें।
- तिलक करें, चंदन, सिंदूर और अक्षत से।
- दूर्वा और फूल चढ़ाएं, इक्कीस दूर्वा और ताज़े फूल।
- धूप दीप दिखाएं
- भोग लगाएं, मोदक या लड्डू, ध्यान रहे तुलसी पत्ता बिल्कुल न रखें, गणेश जी की पूजा में यह वर्जित है।
- मंत्र जाप करें, नीचे दिए मंत्रों में से जो भी आपको याद हो या पढ़ना चाहें।
- आरती करें, दीया लेकर, घंटी बजाते हुए।
- तीन बार परिक्रमा करें
- हाथ जोड़कर माफी मांगें, अगर पूजा में कहीं कोई कमी रह गई हो।
- प्रसाद बांटें, घर के सब लोगों को।
मंत्र
पूजा के दौरान इनमें से जो भी याद हो, वो बोल सकते हैं। रोज़ करने वाले पहला मंत्र ही ज़्यादातर इस्तेमाल करते हैं।
ॐ गं गणपतये नमःसबसे सरल और सबसे ज़्यादा बोला जाने वाला मंत्र
वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ। निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥रास्ते की रुकावटें दूर करने के लिए
ॐ एकदन्ताय विद्महे वक्रतुण्डाय धीमहि। तन्नो दन्ती प्रचोदयात्॥गणेश गायत्री मंत्र
छोटी छोटी बातें जो याद रखें
- तुलसी पत्ता कभी न चढ़ाएं, गणेश पूजा में इसकी मनाही है।
- मूर्ति टूटी या खंडित नहीं होनी चाहिए।
- पूजा जल्दबाज़ी में न करें, मन शांत रखकर करें।
- अगर रोज़ पूजा करते हैं तो एक तय समय बना लें, इससे एक अच्छी आदत बन जाती है।
इस अनुष्ठान एवं दैनिक साधना हेतु आवश्यक प्रामाणिक सामग्री
कर्मकांडी आचार्यों के परामर्श अनुसार पूजा-पाठ में केवल शुद्ध धातु के पात्र एवं प्रामाणिक धर्मग्रंथों का ही उपयोग करना चाहिए:
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