ध्रुव की कथा
रात के आकाश में जो तारा हमेशा एक ही जगह टिका दिखता है, जिसके चारों ओर बाकी सारे तारे घूमते नज़र आते हैं, उसे ध्रुव तारा कहा जाता है। पर बहुत कम लोग जानते हैं कि यह नाम एक छोटे से बालक की अटूट भक्ति की कहानी से जुड़ा है।
राजमहल से मिला अपमान
ध्रुव, राजा उत्तानपाद के पुत्र थे। राजा की दो रानियां थीं, सुनीति और सुरुचि। ध्रुव सुनीति के पुत्र थे, पर राजा सुरुचि से अधिक प्रेम करते थे, इसलिए सुरुचि का पुत्र उत्तम राजा को अधिक प्रिय था।
एक दिन छोटे ध्रुव अपने पिता की गोद में बैठना चाहते थे। पर सुरुचि ने उन्हें रोकते हुए कठोर शब्दों में कहा कि यह गोद केवल उसके पुत्र के लिए है, और अगर ध्रुव को राजा की गोद में बैठना है तो पहले उसे सुरुचि के गर्भ से जन्म लेना होगा। यह सुनकर छोटे ध्रुव का मन बहुत आहत हुआ। वे रोते हुए अपनी मां सुनीति के पास गए।
मां की सीख, वन की ओर कदम
मां सुनीति ने ध्रुव को समझाया कि संसार में मान-अपमान सब कर्मों के फल हैं, पर अगर वे सच में सबसे ऊंचा स्थान चाहते हैं, तो उन्हें भगवान विष्णु की शरण लेनी चाहिए। यह सुनकर छोटे ध्रुव के मन में एक दृढ़ निश्चय जाग उठा। वे मात्र पांच वर्ष की आयु में ही महल छोड़कर जंगल की ओर चल पड़े, भगवान की खोज में।
रास्ते में उन्हें नारद मुनि मिले। नारद जी ने एक छोटे बालक को अकेले जंगल जाते देखकर उन्हें रोकने की कोशिश की, समझाया कि यह मार्ग अत्यंत कठिन है। पर ध्रुव का निश्चय अटल था। उनकी दृढ़ता देखकर नारद मुनि प्रसन्न हुए और उन्हें भगवान विष्णु की उपासना की विधि और मंत्र सिखाया।
कठोर तपस्या
ध्रुव ने यमुना के किनारे जाकर घोर तपस्या शुरू की। पहले महीने वे केवल फल खाकर रहे, फिर सूखे पत्ते खाकर, फिर सिर्फ जल पीकर, और अंत में बिना जल के भी, केवल श्वास पर नियंत्रण करते हुए, एक पैर पर खड़े होकर तप करने लगे। उनकी तपस्या इतनी तीव्र थी कि पूरी सृष्टि में हलचल मच गई।
भगवान विष्णु का दर्शन
अंततः भगवान विष्णु स्वयं प्रसन्न होकर प्रकट हुए। पांच वर्ष के बालक ध्रुव ने जब अपने सामने साक्षात भगवान को देखा, तो उनकी वर्षों की तपस्या का फल मिल गया। भगवान विष्णु ने उन्हें आशीर्वाद दिया, और यह वरदान भी दिया कि जब तक यह सृष्टि रहेगी, तब तक ध्रुव आकाश में एक अटल तारे के रूप में चमकते रहेंगे, जिसके चारों ओर बाकी सभी तारे और ग्रह घूमते रहेंगे।
यही कारण है कि आज भी रात के आकाश में उस स्थिर तारे को ध्रुव तारा कहा जाता है, जो दिशा बताने के लिए सदियों से यात्रियों का मार्गदर्शन करता आया है।
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