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चैत्र नवरात्रि पूजा विधि, कलश स्थापना से राम नवमी तक

✍️ लेखक: पंडित शिवम तिवारी
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चैत्र नवरात्रि पूजा विधि, कलश स्थापना से राम नवमी तक
🔱 माँ दुर्गा · श्रीराम

चैत्र नवरात्रि पूजा विधि, कलश स्थापना से राम नवमी तक

पूजा विधि · वसंत ऋतु का नौ दिवसीय व्रत, संपूर्ण विधि सहित

साल में जो दो प्रमुख नवरात्रि आती हैं, उनमें से चैत्र नवरात्रि वसंत ऋतु में आती है, हिंदू नववर्ष की शुरुआत के साथ। यह नौ दिन माँ दुर्गा के नौ रूपों को समर्पित होते हैं, और सबसे खास बात यह है कि इसका नौवां दिन राम नवमी के रूप में मनाया जाता है, यानी स्वयं भगवान श्रीराम के जन्म का दिन। इस तरह चैत्र नवरात्रि शक्ति उपासना और श्रीराम जन्मोत्सव, दोनों को एक साथ समेटे हुए है।

चैत्र नवरात्रि

चैत्र नवरात्रि, शरद नवरात्रि से किस प्रकार अलग

शरद नवरात्रि की तरह ही चैत्र नवरात्रि में भी नौ दिन माँ दुर्गा के नौ रूपों, शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कूष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और सिद्धिदात्री की पूजा होती है, और विधि भी काफी हद तक समान रहती है। अंतर बस इतना है कि शरद नवरात्रि का समापन विजयादशमी (दशहरा) पर होता है, जबकि चैत्र नवरात्रि नौवें दिन राम नवमी के रूप में, यानी भगवान श्रीराम के जन्मोत्सव के साथ पूर्ण होती है। साथ ही चैत्र नवरात्रि हिंदू पंचांग के नववर्ष के पहले दिन से शुरू होती है, इसलिए इसे नई शुरुआत का भी प्रतीक माना जाता है।

पूजा से पहले की तैयारी

  • घर और पूजा स्थान को अच्छी तरह साफ करें, नवरात्रि शुरू होने से पहले।
  • चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को सुबह के शुभ मुहूर्त में कलश स्थापना करें, यही दिन हिंदू नववर्ष का पहला दिन भी होता है।
  • अगर व्रत रखना चाहें, तो नौ दिन या कम से कम पहले और अंतिम दिन का व्रत रखा जा सकता है।
  • माँ दुर्गा की मूर्ति या चित्र के साथ भगवान श्रीराम की तस्वीर भी पूजा स्थान पर रखें, क्योंकि नौवें दिन राम नवमी भी मनाई जाएगी।

घटस्थापना के लिए सामग्री

  • मिट्टी का पात्र या कलश, जौ बोने के लिए
  • साफ मिट्टी और जौ के बीज
  • तांबे या मिट्टी का कलश, जल भरने के लिए
  • आम के पत्ते, कलश के मुख पर रखने के लिए
  • नारियल, कलश के ऊपर रखने के लिए
  • लाल कपड़ा, कलश लपेटने के लिए
  • सुपारी, सिक्का, अक्षत, कलश में डालने के लिए
  • दुर्गा जी एवं श्रीराम की मूर्ति या चित्र
  • लाल चुनरी और सिंदूर
  • अखंड ज्योति के लिए घी का दीपक, नौ दिन जलाने हेतु
  • फूल, धूप, नैवेद्य

घटस्थापना विधि

  1. स्थान शुद्धि, पूजा स्थान को गंगाजल से शुद्ध करें।
  2. मिट्टी के पात्र में जौ बोएं, साफ मिट्टी बिछाकर उसमें जौ के बीज डालें।
  3. कलश तैयार करें, कलश में जल भरें, उसमें सुपारी, सिक्का और अक्षत डालें।
  4. आम के पत्ते और नारियल रखें, कलश के मुख पर आम के पत्ते रखें, ऊपर लाल कपड़े में लिपटा नारियल रखें।
  5. कलश स्थापना करें, तैयार कलश को जौ वाले पात्र के पास स्थापित करें।
  6. देवी का आवाहन करें, हाथ जोड़कर माँ दुर्गा का ध्यान करें और उन्हें आमंत्रित करें।
  7. अखंड ज्योति जलाएं, घी का दीपक जलाएं, इसे नौ दिन तक जलता रखने का प्रयास करें।
  8. संकल्प लें, नौ दिन पूजा और (यदि हो तो) व्रत का संकल्प लें।

रोज़ की पूजा विधि

  1. सुबह स्नान के बाद देवी को जल, फूल, अक्षत और सिंदूर अर्पित करें।
  2. उस दिन के स्वरूप का ध्यान करें और उनका मंत्र या स्तुति पढ़ें।
  3. धूप-दीप दिखाएं और भोग अर्पित करें।
  4. शाम को आरती करें, पूरे परिवार के साथ।
  5. अखंड ज्योति की देखभाल करें, ताकि वह बुझने न पाए।
राम नवमी

नौवां दिन, राम नवमी

चैत्र नवरात्रि के नौवें दिन को राम नवमी के रूप में विशेष धूमधाम से मनाया जाता है, क्योंकि इसी तिथि को अयोध्या में राजा दशरथ के घर भगवान श्रीराम का जन्म हुआ था। इस दिन विशेष रूप से निम्न कार्य किए जाते हैं।

  • सुबह श्रीराम, माता सीता, लक्ष्मण और हनुमान जी की पूजा की जाती है।
  • मध्याह्न (दोपहर) के समय श्रीराम के जन्म का उत्सव मनाया जाता है, क्योंकि पौराणिक मान्यता अनुसार उनका जन्म दोपहर के समय हुआ था।
  • घरों और मंदिरों में रामायण या रामचरितमानस के बालकाण्ड से राम जन्म का प्रसंग पढ़ा या सुना जाता है।
  • व्रत का पारण (समापन) इसी दिन किया जाता है, नौ दिन के व्रत के बाद।
  • कन्या पूजन भी इसी दिन या अष्टमी के दिन किया जाता है, नौ छोटी कन्याओं को देवी का रूप मानकर उनकी पूजा और भोजन कराया जाता है।

मंत्र

ॐ दुं दुर्गायै नमः दुर्गा बीज मंत्र, नवरात्रि के नौ दिनों के लिए
श्री रामचंद्राय नमः राम नवमी के दिन जपने योग्य सरल मंत्र

ध्यान रखने योग्य बातें

  • अखंड ज्योति जलाई है तो उसे अकेला न छोड़ें, आग से जुड़ी सावधानी बरतें।
  • व्रत रख रहे हों तो शरीर के अनुसार सही आहार लें, स्वास्थ्य का ध्यान रखें।
  • चूंकि यह हिंदू नववर्ष का भी समय है, घर में स्वच्छता और सकारात्मकता बनाए रखना विशेष शुभ माना जाता है।
महत्व: चैत्र नवरात्रि केवल शक्ति उपासना का पर्व नहीं, बल्कि नई शुरुआत, संयम और मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम के आदर्शों को याद करने का भी अवसर है। यही कारण है कि यह पर्व वर्ष के पहले दिन से शुरू होकर श्रीराम जन्मोत्सव पर पूर्ण होता है, मानो नया साल स्वयं मर्यादा और शक्ति के आशीर्वाद से शुरू हो रहा हो।
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