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कृष्ण जी की आरती, भाव एवं महत्व

✍️ लेखक: पंडित शिवम तिवारी
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कृष्ण जी की आरती, भाव एवं महत्व
🦚 भगवान कृष्ण

कृष्ण जी की आरती, भाव एवं महत्व

आरती · भाव, कहानी एवं महत्व

जन्माष्टमी हो या रोज़ की संध्या आरती, भगवान कृष्ण की आरती हर वैष्णव घर और मंदिर में विशेष श्रद्धा से गाई जाती है। यहां हम इस आरती के भाव, इसमें छिपे प्रसंगों और इसके महत्व को समझते हैं।

आरती में क्या वर्णन है

भगवान कृष्ण की आरतियों में सामान्यतः उनके बाल रूप, मोरपंख धारण किए मनमोहक छवि, वृंदावन की लीलाओं, राधा-कृष्ण के प्रेम, और गोपियों संग रास लीला का सुंदर वर्णन मिलता है। उनकी मुरली की मधुर धुन, माखन चोरी की बाल लीलाएं, और यशोदा मैया के वात्सल्य का भी ज़िक्र आरतियों में आम है।

आरती में आए प्रसंग

कृष्ण जी की आरतियों में उनकी अनेक लीलाओं का उल्लेख मिलता है, कंस वध, पूतना वध, कालिया नाग दमन, गोवर्धन पर्वत उठाना, और महाभारत में अर्जुन को गीता का उपदेश देना। ये सभी प्रसंग दिखाते हैं कि भगवान कृष्ण ने हर युग में धर्म की रक्षा के लिए अलग-अलग रूपों में लीला की, कभी बाल सुलभ शरारतों से, तो कभी महान युद्धनीति और ज्ञान से।

आरती का भाव

कृष्ण जी की आरती में भक्त अपने प्रिय ठाकुर जी की छवि का ध्यान करते हुए उनसे प्रेम और भक्ति की भावना व्यक्त करते हैं। यह आरती विशेष रूप से जन्माष्टमी, गोवर्धन पूजा, और नियमित संध्या आरती के समय गाई जाती है, दीपक की रोशनी और शंख-घंटी की ध्वनि के साथ।

आरती के पूरे बोल कहां मिलेंगे: संगीत रचना होने के कारण हम यहां आरती के संपूर्ण बोल नहीं दे पा रहे, कृपया इसे अपने घर की पूजा-पुस्तक, मंदिर में उपलब्ध आरती संग्रह, या किसी भरोसेमंद संगीत ऐप से सुनकर सीखें।
कब गाएं: जन्माष्टमी, गोवर्धन पूजा, बुधवार, या नियमित संध्या पूजा के समय कृष्ण जी की आरती गाना विशेष शुभ माना जाता है।

शास्त्रोक्त अनुष्ठान सामग्री प्रामाणिक स्रोत • गीताप्रेस गोरखपुर

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