☀️ छठी मैया · सूर्य देव
छठ पूजा विधि, चार दिवसीय संपूर्ण अनुष्ठान
पूजा विधि · नहाय-खाय से पारण तक, पूरी विधि सहित
छठ पूजा सूर्य देव और छठी मैया की आराधना का महापर्व है, जो मुख्यतः बिहार, उत्तर प्रदेश और झारखंड में अत्यंत श्रद्धा से मनाया जाता है, पर अब यह पूरे भारत और विदेशों में भी बसे लोगों द्वारा मनाया जाता है। यह पर्व अपनी कठोर व्रत विधि और सामूहिक श्रद्धा के लिए जाना जाता है, जो चार दिनों तक चलता है।
छठ पूजा के चार दिन
पहला दिन, नहाय-खाय
व्रती स्नान करके शुद्ध सात्विक भोजन ग्रहण करते हैं, आमतौर पर कद्दू-भात और चने की दाल, यह व्रत की शुरुआत का प्रतीक है।
दूसरा दिन, खरना
पूरे दिन निर्जला व्रत रखने के बाद शाम को गुड़ की खीर, रोटी और फल का प्रसाद बनाकर ग्रहण किया जाता है। इसके बाद 36 घंटे का निर्जला व्रत शुरू होता है।
तीसरा दिन, संध्या अर्घ्य
शाम को नदी या तालाब के किनारे जाकर डूबते हुए सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है। यह छठ पूजा का सबसे महत्वपूर्ण अनुष्ठान है, जिसमें पूरा परिवार जल में खड़े होकर सूर्य देव की आराधना करता है।
चौथा दिन, उषा अर्घ्य एवं पारण
सुबह उगते हुए सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है, इसके बाद व्रत का पारण किया जाता है, यहीं छठ पूजा का समापन होता है।
आवश्यक सामग्री
- बांस की टोकरी (सूप), अर्घ्य सामग्री रखने के लिए
- मौसमी फल, केला, नारियल, सेब, गन्ना, सिंघाड़ा
- ठेकुआ, आटे और गुड़ से बना विशेष प्रसाद
- चावल का आटा और गुड़
- दीपक एवं धूप
- नए वस्त्र, व्रती के लिए, महिलाएं आमतौर पर साड़ी पहनती हैं
- दूध और जल, अर्घ्य के लिए
- हल्दी का पौधा (सहित), अर्घ्य सामग्री में सजाने के लिए
अर्घ्य देने की विधि
- घाट पर पहुंचें, शाम होने से पहले पूरे परिवार सहित नदी या तालाब के किनारे पहुंचें।
- सूप सजाएं, बांस की टोकरी में सभी फल, ठेकुआ और प्रसाद सजाएं।
- जल में खड़े हों, व्रती जल में कमर तक खड़े होकर सूप हाथ में लें।
- अर्घ्य दें, डूबते सूर्य को जल और दूध से अर्घ्य अर्पित करें।
- अगली सुबह दोहराएं, उगते सूर्य को भी इसी प्रकार अर्घ्य दिया जाता है।
- प्रसाद वितरण करें, अर्घ्य के बाद प्रसाद परिवार और आस-पास के लोगों में बांटा जाता है।
ध्यान रखने योग्य बातें
- छठ पूजा की सामग्री और प्रसाद बनाते समय अत्यंत स्वच्छता का ध्यान रखा जाता है, अक्सर व्रती स्वयं ही इसे बनाते हैं।
- 36 घंटे का निर्जला व्रत शारीरिक रूप से कठिन है, इसलिए स्वास्थ्य समस्या होने पर डॉक्टर की सलाह अवश्य लें।
- घाट पर सुरक्षा का पूरा ध्यान रखें, विशेषकर बच्चों के साथ।
महत्व: छठ पूजा प्रकृति पूजा का अद्भुत उदाहरण है, जिसमें सूर्य को जीवनदाता मानकर उसकी आराधना की जाती है। यह पर्व अनुशासन, कृतज्ञता और सामूहिक श्रद्धा का प्रतीक है, जहां अमीर-गरीब सभी एक साथ नदी किनारे खड़े होकर सूर्य को अर्घ्य देते हैं।
शास्त्रोक्त अनुष्ठान सामग्री
प्रामाणिक स्रोत • गीताप्रेस गोरखपुर
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