|| ॐ श्री गणेशाय नमः || सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामयाः || असतो मा सद्गमय तमसो मा ज्योतिर्गमय ||

वास्तु शांति पूजा विधि, सामग्री, मंत्र एवं महत्व

✍️ लेखक: पंडित शिवम तिवारी
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vastu shanti vidhi
🏠 वास्तु पुरुष · गणेश जी

वास्तु शांति पूजा विधि, सामग्री, मंत्र एवं महत्व

पूजा विधि · संपूर्ण विधि, वास्तु दोष निवारण सहित

घर बनाते समय या पुराने घर में किसी बड़े बदलाव के बाद, कई परिवार वास्तु शांति पूजा करवाते हैं। यह पूजा घर की भूमि और संरचना में मौजूद संभावित वास्तु दोषों को शांत करने, और वास्तु पुरुष को प्रसन्न करने के लिए की जाती है, ताकि घर में रहने वालों को सुख, समृद्धि और स्वास्थ्य प्राप्त हो।

वास्तु पूजा हवन

वास्तु पुरुष कौन हैं

पौराणिक कथा के अनुसार वास्तु पुरुष एक विशाल शरीर वाले देवता हैं, जिन्हें देवताओं ने भूमि पर औंधे मुंह लिटा दिया था, ताकि वे उत्पात न मचाएं। तभी से मान्यता है कि हर निर्माण (घर, मंदिर, इमारत) वास्तु पुरुष के शरीर पर ही बनता है, और इसलिए निर्माण से पहले या बाद में उन्हें प्रसन्न करना आवश्यक माना जाता है, ताकि वे क्रोधित न हों और घर में रहने वालों को कोई कष्ट न दें।

वास्तु शांति पूजा कब करवाई जाती है

  • नए घर के निर्माण से पहले, नींव रखते समय।
  • गृह प्रवेश के समय (अक्सर गृह प्रवेश पूजा के साथ ही वास्तु पूजा भी शामिल होती है)।
  • घर में लगातार समस्याएं, बीमारियां या आर्थिक तंगी महसूस होने पर।
  • घर में बड़ा नवीनीकरण या तोड़-फोड़ करवाने के बाद।
  • पुराना घर खरीदने के बाद, जिसका इतिहास ठीक से ज्ञात न हो।

पूजा से पहले की तैयारी

  • पंडित जी से पंचांग देखकर शुभ मुहूर्त निकलवाएं।
  • घर की पूरी सफाई करवाएं, विशेषकर ईशान कोण (उत्तर-पूर्व दिशा) को स्वच्छ रखें, जो वास्तु में सबसे पवित्र दिशा मानी जाती है।
  • हवन की व्यवस्था के लिए उपयुक्त स्थान तैयार करें, आमतौर पर आंगन या बड़े कमरे में।
  • सभी सामग्री एक दिन पहले ही एकत्रित कर लें।

आवश्यक सामग्री

  • गणेश जी एवं वास्तु देवता की मूर्ति या चित्र
  • हवन कुंड, आम की लकड़ी, हवन सामग्री
  • कलश, जल, आम के पत्ते, नारियल सहित
  • अक्षत, रोली, हल्दी, कुमकुम, चंदन
  • नवग्रह पूजन सामग्री (यदि नवग्रह शांति भी साथ करवाई जा रही हो)
  • पंचामृत
  • फल, फूल, मिठाई
  • घी, तिल, जौ, हवन आहुति के लिए
  • धूप, दीप, कपूर

पूजा विधि

  1. संकल्प लें, हाथ में जल, अक्षत और फूल लेकर पूजा का उद्देश्य बोलें।
  2. गणेश पूजा करें, विघ्नहर्ता गणेश जी की पूजा से शुरुआत करें।
  3. कलश स्थापना करें, जल से भरा कलश स्थापित करें।
  4. वास्तु पुरुष का आवाहन करें, विशेष मंत्रों के साथ वास्तु पुरुष को पूजा में आमंत्रित करें।
  5. नवग्रह पूजन करें (यदि विधि में शामिल हो), नौ ग्रहों की शांति के लिए संक्षिप्त पूजा करें।
  6. हवन प्रारंभ करें, पंडित जी के मार्गदर्शन में मंत्रोच्चार के साथ हवन में आहुति दें।
  7. घर के हर कोने में परिक्रमा करें, हवन की पवित्र अग्नि या जल लेकर घर के प्रत्येक कमरे और कोने में जाएं।
  8. ईशान कोण पर विशेष पूजा करें, चूंकि यह दिशा जल तत्व और देवताओं से जुड़ी मानी जाती है।
  9. आरती करें, गणेश जी और वास्तु देवता की आरती करें।
  10. पूर्णाहुति दें, हवन का समापन पूर्णाहुति के साथ करें।
  11. प्रसाद वितरण करें, उपस्थित सभी को प्रसाद दें।
घर की पूजा परिक्रमा

मंत्र

ॐ वास्तु पुरुषाय नमः
ॐ गं गणपतये नमः

वास्तु दोष के सामान्य संकेत

ज्योतिष और वास्तु शास्त्र में कुछ संकेत बताए गए हैं जिनसे वास्तु दोष का अनुमान लगाया जाता है, जैसे घर में बार-बार आर्थिक तंगी, सदस्यों में लगातार बीमारी, आपसी कलह, या घर बेचने-खरीदने में बार-बार समस्या आना। इन स्थितियों में वास्तु शांति पूजा के साथ-साथ किसी अनुभवी वास्तु सलाहकार से घर की बनावट की भी जांच करवाना उचित रहता है।

ध्यान रखने योग्य बातें

  • हवन के दौरान अग्नि सुरक्षा का पूरा ध्यान रखें।
  • पूजा शांत और श्रद्धापूर्ण वातावरण में करें।
  • वास्तु शांति पूजा के साथ घर की वास्तु संरचना में यदि कोई बड़ी खामी हो, तो उसे सुधारने का भी प्रयास करें, केवल पूजा पर निर्भर न रहें।
महत्व: वास्तु शांति पूजा घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करती है और वास्तु दोषों के नकारात्मक प्रभाव को कम करने में सहायक मानी जाती है। यह पूजा परिवार के मानसिक संतोष और घर के प्रति सुरक्षा भाव को भी मजबूत करती है।
शास्त्रोक्त अनुष्ठान सामग्री प्रामाणिक स्रोत • गीताप्रेस गोरखपुर

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