|| ॐ श्री गणेशाय नमः || सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामयाः || असतो मा सद्गमय तमसो मा ज्योतिर्गमय ||

महालक्ष्मी षोडशोपचार पूजन एवं कनकधारा स्तोत्र अनुष्ठान: दीपावली 2026 शुभ मुहूर्त, कुबेर पूजन, श्रीयंत्र प्रतिष्ठा एवं स्थिर लक्ष्मी प्राप्ति

✍️ लेखक: पंडित शिवम तिवारी
• • 📲 WhatsApp शेयर
महालक्ष्मी षोडशोपचार पूजन एवं कनकधारा स्तोत्र अनुष्ठान: दीपावली 2026 शुभ मुहूर्त, कुबेर पूजन, श्रीयंत्र प्रतिष्ठा एवं स्थिर लक्ष्मी प्राप्ति
महालक्ष्मी अनुष्ठान एवं दीपावली पर्व • षोडशोपचार एवं कनकधारा स्तोत्र

सनातन धर्म में कार्तिक कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि का महापर्व दीपावली केवल दीपों का उत्सव नहीं, अपितु ऐश्वर्य, सौभाग्य, आरोग्य और मोक्ष प्रदायिनी आदि पराशक्ति महालक्ष्मी के प्राकट्य और साक्षात भूलोक आगमन की महापुनीत रात्रि है। समुद्र मंथन से क्षीरसागर से प्रकट हुई भगवती महालक्ष्मी की कृपा के बिना मनुष्य का भौतिक और आध्यात्मिक जीवन दोनों अपूर्ण रहते हैं। परंतु लक्ष्मी का स्वभाव चंचला है; वे एक स्थान पर स्थिर तभी होती हैं जहाँ धर्म, सत्य, स्वच्छता, पतिव्रत, गुरु भक्ति और शास्त्रसम्मत पूजन का वास हो। प्रस्तुत शास्त्रीय संकलन में हम वर्ष 2026 दीपावली के सर्वश्रेष्ठ प्रदोष काल एवं स्थिर लग्न (वृषभ एवं सिंह लग्न) मुहूर्त, संपूर्ण षोडशोपचार पूजन सामग्री, श्रीयंत्र एवं कुबेर देवता की प्रतिष्ठा, जगद्गुरु आदि शंकराचार्य कृत चमत्कारी ‘कनकधारा स्तोत्र’ के अनुष्ठान तथा स्थिर लक्ष्मी प्राप्ति के तात्विक नियमों का विस्तार से विवेचन कर रहे हैं।

1. दीपावली 2026: सर्वश्रेष्ठ शुभ मुहूर्त एवं लग्न विचार

दीपावली की रात्रि में माता लक्ष्मी का पूजन सदैव प्रदोष काल और स्थिर लग्न में किया जाना शास्त्रसम्मत माना गया है। चर लग्न में पूजन करने से लक्ष्मी चंचल होकर चली जाती हैं, जबकि स्थिर लग्न में की गई पूजा से कुल में पीढ़ियों तक स्थिर लक्ष्मी का वास होता है:

पूजन मुहूर्त का नाम लग्न / काल श्रेष्ठता एवं किसके लिए उपयुक्त
प्रदोष काल मुहूर्त संध्या 05:45 PM से 08:15 PM सर्वश्रेष्ठ गृहस्थ पूजन, दुकान एवं व्यापारिक प्रतिष्ठान
वृषभ लग्न (स्थिर लग्न) शाम 06:20 PM से 08:18 PM स्थिर धन वृद्धि, पारिवारिक सुख, स्वर्ण एवं आभूषण प्रतिष्ठा
महानिशीथ काल रात्रि 11:38 PM से 12:30 AM साधकों, तांत्रिकों एवं श्रीयंत्र सिद्धि हेतु सर्वश्रेष्ठ
सिंह लग्न (स्थिर लग्न) मध्यरात्रि 12:45 AM से 03:00 AM कनकधारा अनुष्ठान, दारिद्र्य दहन स्तोत्र एवं कुबेर भंडार सिद्धि

2. संपूर्ण षोडशोपचार पूजन सामग्री तालिका

वर्ग विशिष्ट सामग्री आध्यात्मिक महत्व
पुष्प एवं पत्र कमल पुष्प (कम से कम 2 या 5), गेंदे की माला, दूर्वा, बेलपत्र, पान के पत्ते कमल लक्ष्मी का आसन है; बेलपत्र शिव-लक्ष्मी प्रिय है
द्रव्य एवं नैवेद्य खीर, सफेद मिष्ठान, मखाना, बताशे, पंचमेवा, अनार, श्रीफल (नारियल) क्षीरसागर प्राकट्य के कारण दुग्ध-निर्मित नैवेद्य अति प्रिय
सौभाग्य वस्तुएं रक्त चंदन, कुंकुम, सिन्दूर, हल्दी की गांठ, कमलगट्टा, गोमती चक्र, पीली कौड़ियां कौड़ी और गोमती चक्र लक्ष्मी के सहोदर (समुद्र मंथन रत्न) हैं
प्रतिष्ठा यंत्र स्फटिक या ताम्र श्रीयंत्र, चांदी के लक्ष्मी-गणेश सिक्के, कुबेर यंत्र श्रीयंत्र समस्त ब्रह्मांडीय ऊर्जा का केंद्र बिंदु है

3. क्रमबद्ध षोडशोपचार पूजन विधि

  1. ध्यानावाहन: ‘ॐ महालक्ष्म्यै च विद्महे विष्णुपत्नी च धीमहि तन्नो लक्ष्मीः प्रचोदयात्।’ हाथ में अक्षत-पुष्प लेकर भगवती का ध्यान करें।
  2. आसन: ‘अनेकरत्नसंयुक्तं नानामणिसमन्वितम्…’ कमल पुष्प पर भगवती को विराजित करें।
  3. पाद्य, अर्घ्य एवं आचमन: सुगंधित जल, गुलाब जल और गंगाजल से चरण प्रक्षालन कराएं।
  4. पंचामृत स्नान: दूध, दही, घृत, मधु और शर्करा के पंचामृत से स्नान कराकर पुनः शुद्ध जल से स्नान कराएं।
  5. वस्त्र एवं उपवस्त्र: लाल रंग की रेशमी चुनरी और मौली अर्पित करें।
  6. यज्ञोपवीत एवं गंध: भगवान गणेश को जनेऊ और माता को अष्टगंध, कुंकुम और चंदन अर्पित करें।
  7. पुष्प एवं अक्षत: रक्त कमल और गुलाब के पुष्पों की माला पहनाएं।
  8. धूप एवं दीप: गुग्गल धूप और शुद्ध गोघृत का दीपक दिखाएं।
  9. नैवेद्य एवं ताम्बूल: खीर, मिष्ठान, ऋतुफल तथा लौंग-इलायची युक्त पान अर्पित करें।
  10. दक्षिणा एवं श्रीफल: चांदी का सिक्का और श्रीफल अर्पित करें।
  11. कनकधारा स्तोत्र पाठ: आदि शंकराचार्य कृत स्तोत्र का पाठ करें।
  12. आरती एवं प्रदक्षिणा: कर्पूर आरती करें और प्रदक्षिणा कर क्षमा प्रार्थना करें।

3.1 महालक्ष्मी अष्टोत्तर शतनामावली (108 पावन नाम एवं मंत्र)

दीपावली की महानिशीथ रात्रि में प्रत्येक नाम के साथ कमल पुष्प अथवा कमलगट्टा अर्पित करते हुए माता लक्ष्मी के इन 108 पावन नामों का उच्चारण स्थिर लक्ष्मी को बांध देता है:

  • ॐ प्रकृत्यै नमः • ॐ विकृत्यै नमः • ॐ विद्यायै नमः • ॐ सर्वभूतहितप्रदायै नमः
  • ॐ श्रद्धायै नमः • ॐ विभूत्यै नमः • ॐ सुरभ्यै नमः • ॐ परमात्मिकायै नमः
  • ॐ वाचे नमः • ॐ पद्मालयायै नमः • ॐ पद्मायै नमः • ॐ शुचये नमः • ॐ स्वाहायै नमः
  • ॐ स्वधायै नमः • ॐ सुधायै नमः • ॐ धन्यायै नमः • ॐ हिरण्मय्यै नमः • ॐ लक्ष्म्यै नमः
  • ॐ नित्यपुष्टायै नमः • ॐ विभावर्यै नमः • ॐ अदित्यै नमः • ॐ दित्यै नमः • ॐ दीप्तायै नमः
  • ॐ वसुधायै नमः • ॐ वसुधारिण्यै नमः • ॐ कमलायै नमः • ॐ कान्तायै नमः • ॐ कामाक्ष्यै नमः
  • ॐ क्षीरोदसंभवायै नमः • ॐ अनुग्रहप्रदायै नमः • ॐ बुद्धये नमः • ॐ अनघायै नमः • ॐ हरिवल्लभायै नमः
  • ॐ अशोकायै नमः • ॐ अमृतायै नमः • ॐ दीप्तायै नमः • ॐ लोकशोकविनाशिन्यै नमः
  • ॐ धर्मनिलयायै नमः • ॐ करुणायै नमः • ॐ लोकमात्रे नमः • ॐ पद्मप्रियायै नमः • ॐ पद्महस्तायै नमः
  • ॐ पद्माक्ष्यै नमः • ॐ पद्मसुन्दर्यै नमः • ॐ पद्मोद्भवायै नमः • ॐ पद्ममुख्यै नमः • ॐ पद्मनाभप्रियायै नमः
  • ॐ तुष्टये नमः • ॐ पुष्टये नमः • ॐ शिवायै नमः • ॐ विष्णुपत्न्यै नमः • ॐ महालक्ष्म्यै नमः

3.2 स्थिर लक्ष्मी प्राप्ति हेतु सिद्ध बीजाक्षर महामंत्र

दीपावली की रात्रि में सिंह लग्न में कमलगट्टे की माला से निम्नलिखित एकाक्षरी एवं नर्वाण लक्ष्मी बीज मंत्र का 11 माला (1188 बार) जप करने से व्यापार और गृह में कभी दरिद्रता प्रवेश नहीं करती:

॥ सिद्ध लक्ष्मी बीज मंत्र ॥
ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं त्रिभुवन महालक्ष्म्यै अस्मांक दारिद्र्य नाशय प्रचुर धन देहि क्लीं ह्रीं श्रीं ॐ नमः॥

4. आदि शंकराचार्य कृत श्री कनकधारा स्तोत्र रहस्य

जब जगद्गुरु आदि शंकराचार्य बाल्यकाल में भिक्षाटन हेतु एक अत्यंत दरिद्र ब्राह्मणी के द्वार पर पहुंचे, तो उस ब्राह्मणी के पास देने के लिए एक सूखे आंवले के अतिरिक्त कुछ न था। उसने अत्यंत संकोच और अश्रुपूरित नेत्रों से वह आंवला शंकराचार्य की झोली में डाल दिया। ब्राह्मणी की इस निस्वार्थ त्याग भावना को देखकर शंकराचार्य जी का हृदय द्रवित हो उठा। उन्होंने वहीं खड़े होकर माता लक्ष्मी की स्तुति में 21 श्लोकों का ‘कनकधारा स्तोत्र’ रचा। माता लक्ष्मी ने साक्षात प्रकट होकर आकाश से उस दरिद्र ब्राह्मणी के घर में स्वर्ण आंवलों की वर्षा कर दी। दीपावली की रात्रि में कनकधारा स्तोत्र का पाठ करने से जन्म-जन्मांतर की दरिद्रता का नाश होता है।

अंगं हरेः पुलकभूषणमाश्रयन्ती भृंगांगनेव मुकुलाभरणं तमालम्।
अंगीकृताखिलविभूतिरपांगलीला मांगल्यदास्तु मम मंगलदेवतायाः॥

4.1 जगद्गुरु आदि शंकराचार्य कृत कनकधारा स्तोत्र के प्रमुख श्लोक एवं भावार्थ

कनकधारा स्तोत्र के 21 श्लोक अलौकिक ऊर्जा से स्पंदित हैं। दीपावली की रात्रि में इन श्लोकों का पाठ साक्षात स्वर्ण लक्ष्मी का आवाहन करता है:

मुग्धा मुहुर्विदधती वदने मुरारेः प्रेमत्रपाप्रणिहितानि गतागतानि।
माला दृशोर्मधुकरीव महोत्पले या सा मे श्रियं दिशतु सागरसंभवायाः॥

भावार्थ: जिस प्रकार भ्रमरी विशाल नीलकमल के चारों ओर मंडराती है, उसी प्रकार माता लक्ष्मी की प्रेम और लज्जा से भरी हुई चंचल चितवन भगवान मुरारी के मुखारविंद पर बार-बार जाकर लौट आती है। समुद्र कन्या भगवती महालक्ष्मी की वह कृपा दृष्टि मुझ पर धन-धान्य और परम ऐश्वर्य की वर्षा करे।

दद्याद् दयानुपवनो द्रविणाम्बुधारामस्मिन्नकिञ्चनविहङ्गशिशौ विषण्णे।
दुष्कर्मघर्ममपनीय चिराय दूरं नारायणप्रणयिनीनयनाम्बुवाहः॥

भावार्थ: हे नारायण प्रिया! मुझ दीन-हीन, दुखी और साधनहीन चातक शिशु पर अपनी दया रूपी पवन से प्रेरित होकर सुवर्ण रूपी जलधारा की वर्षा कीजिए, जिससे मेरे पूर्वजन्मों के संचित पाप रूपी ग्रीष्म की प्रचंड तपन सदा के लिए शांत हो जाए।

4.2 यम दीपदान एवं धनतेरस कुबेर पूजन विधान

दीपावली महापर्व पांच दिवसीय दीपोत्सव है। धनतेरस के दिन सायंकाल दक्षिण दिशा की ओर मुख करके यमराज के निमित्त चौमुखी आटे का दीपक (यम दीपम) जलाया जाता है, जिससे परिवार में किसी भी सदस्य की अकाल मृत्यु नहीं होती। इसी रात्रि भगवान धन्वंतरि (आरोग्य के देवता) और यक्षराज कुबेर (धन के कोषाध्यक्ष) का षोडशोपचार पूजन किया जाता है: ‘ॐ यक्षाय कुबेराय वैश्रवणाय धनधान्याधिपतये धनधान्यसमृद्धिं मे देहि दापय स्वाहा।’

4.3 ऋग्वैदिक श्री सूक्तम् (संपूर्ण 16 मंत्र एवं तात्विक महात्म्य)

ऋग्वेद के खिलभाग में स्थित ‘श्री सूक्तम्’ माता महालक्ष्मी की आराधना का आदिम एवं सर्वोच्च वैदिक स्तोत्र है। दीपावली की रात्रि में कमल पुष्पों और शुद्ध गोघृत से श्री सूक्त के 16 मंत्रों द्वारा हवन करने से दारिद्र्य का समूल नाश होता है:

ॐ हिरण्यवर्णां हरिणीं सुवर्णरजतस्रजाम्। चन्द्रां हिरण्मयीं लक्ष्मीं जातवेदो म आवह॥१॥
तां म आवह जातवेदो लक्ष्मीमनपगामिनीम्। यस्यां हिरण्यं विन्देयं गामश्वं पुरुषानहम्॥२॥
अश्वपूर्वां रथमध्यां हस्तिनादप्रबोधिनीम्। श्रियं देवीमुपह्वये श्रीर्मा देवी जुषताम्॥३॥
कांसोस्मितां हिरण्यप्राकारामार्द्रां ज्वलन्तीं तृप्तां तर्पयन्तीम्। पद्मे स्थितां पद्मवर्णां तामिहोपह्वये श्रियम्॥४॥
चन्द्रां प्रभासां यशसा ज्वलन्तीं श्रियं लोके देवजुष्टामुदाराम्। तां पद्मिनीमीं शरणमहं प्रपद्येऽलक्ष्मीर्मे नश्यतां त्वां वृणे॥५॥

आध्यात्मिक भावार्थ: हे अग्निदेव! सुवर्ण के समान कांति वाली, हरिणी रूपिणी, सुवर्ण एवं रजत के हार धारण करने वाली, चंद्र के समान शीतल एवं प्रकाशमान महालक्ष्मी को मेरे गृह में आवाह्न कीजिए। जिस लक्ष्मी के आगमन से मुझे गौ, अश्व, धन, धान्य और सुयोग्य संतति की प्राप्ति हो और जो लक्ष्मी मुझे कभी छोड़कर न जाएं, उन्हें मेरे कल्याण हेतु सिद्ध कीजिए।

4.4 कनकधारा स्तोत्र के शेष पावन श्लोक एवं स्वर्ण वर्षा रहस्य

आदि शंकराचार्य कृत कनकधारा स्तोत्र के अन्य प्रमुख श्लोक जो दीपावली की रात्रि में अवश्य पढ़ने चाहिए:

कमले कमलाक्षवल्लभे त्वं करुणापूरतरङ्गितैरपाङ्गैः।
अवलोकय मामकिञ्चनानां प्रथमं पङ्कजवासिनि प्रपन्नम्॥
स्तुवन्ति ये स्तुतिभिरमूरन्वहं त्रयीमयीं त्रिभुवनमातरं रमाम्।
गुणाधिका गुरुतरभाग्यभागिनो भवन्ति ते भुवि बुधभाविताशयाः॥

भावार्थ: हे कमल में निवास करने वाली कमल नयन भगवान विष्णु की प्रियतमे! आप अपनी करुणा से परिपूर्ण तरंगों जैसी कृपा दृष्टि से मुझ दीन-हीन, साधनहीन प्रपन्न सेवक की ओर निहारें। जो मनुष्य त्रिवेदमयी, तीनों लोकों की माता रमा (महालक्ष्मी) की इन दिव्य स्तुतियों द्वारा नित्य आराधना करता है, वह इस भूतल पर समस्त सद्गुणों, विपुल ऐश्वर्य और गुरुतर सौभाग्य का स्वामी बनता है और ज्ञानी जन भी उसका आदर करते हैं।

4.5 दीपावली रात्रि के विशेष तांत्रिक एवं सात्विक टोटके (शास्त्र सम्मत)

  • हत्थाजोड़ी एवं सियार सिंगी निषेध: दीपावली पर किसी भी प्रकार के तांत्रिक या जीव-हिंसा युक्त पदार्थों का पूजन निषिद्ध है। केवल सात्विक कमल गट्टा, गोमती चक्र और दक्षिणावर्ती शंख ही पूजनीय हैं।
  • ईशान कोण में अखंड दीप: घर के ईशान कोण (उत्तर-पूर्व) में गाय के शुद्ध घी का एक मुखी दीपक रात्रि भर जलने दें, जो ज्ञान और ऐश्वर्य का प्रकाश फैलाता है।
  • झाड़ू पूजन: धनतेरस या दीपावली के दिन नई सींक वाली झाड़ू खरीदकर उसका कुंकुम-अक्षत से पूजन करें, क्योंकि झाड़ू को दरिद्रता निवारण करने वाली साक्षात अलक्ष्मी-नाशिनी माना गया है।

4.6 श्री सूक्त के फलश्रुति श्लोक एवं अखंड धन प्राप्ति महात्म्य

दीपावली की रात्रि में श्री सूक्त के 16 ऋचाओं के पाठ के उपरांत इस फलश्रुति का पाठ करने से यजमान के घर से दारिद्र्य और अलक्ष्मी सदा के लिए पलायन कर जाती हैं:

यः शुचिः प्रयतो भूत्वा जुहुयादाज्यमन्वहम्।
श्रियः पञ्चदशर्चं च श्रीकामः सततं जपेत्॥
पद्मानने पद्मविपद्मपत्रे पद्मप्रिये पद्मदलायताक्षि।
विश्वप्रिये विष्णुमनोऽनुकूले त्वत्पादपद्मं मयि संनिधत्स्व॥
श्रियै नमः श्रियै नमः श्रियै नमः।

भावार्थ: जो पवित्र और जितेंद्रिय होकर प्रतिदिन घी की आहुति देता है और श्री सूक्त की पंद्रह ऋचाओं का निरंतर जप करता है, वह समस्त भौतिक एवं आध्यात्मिक संपत्तियों को प्राप्त करता है। हे कमलमुखी! हे कमलदल के समान विशाल नेत्रों वाली! हे भगवान विष्णु के मन के अनुकूल आचरण करने वाली जगन्माता! आप अपने पावन चरण कमलों को मेरे हृदय और गृह में सदा के लिए स्थापित कीजिए।

4.7 स्थिर लक्ष्मी प्राप्ति के 7 अचूक तात्विक नियम

  1. गृह में कभी कलह न हो: जहाँ नारी का सम्मान नहीं होता, वहाँ से लक्ष्मी तत्काल रुष्ट होकर प्रस्थान कर जाती हैं।
  2. संध्या काल में झाड़ू न लगाएं: सूर्यास्त के समय घर का कचरा बाहर फेंकना दरिद्रता का साक्षात आवाहन है।
  3. रसोईघर में झूठे बर्तन न रखें: रात्रि में भोजन के उपरांत चूल्हा और बर्तन स्वच्छ करके ही शयन करें।
  4. तुलसी जी के समीप संध्या दीप: प्रत्येक संध्या तुलसी माता के समक्ष गाय के घी का दीपक अवश्य प्रज्वलित करें।
  5. दान और परोपकार: अपनी शुद्ध कमाई का कम से कम दशांश (10%) अथवा कुछ अंश गौशाला, अनाथालय अथवा धर्म कार्यों में लगाएं।
  6. उत्तर दिशा को स्वच्छ रखें: उत्तर दिशा कुबेर का स्थान है; इसे सदैव हल्का, खुला और जल युक्त रखें।
  7. शुक्रवार को श्री सूक्त पाठ: प्रत्येक शुक्रवार को खीर का भोग लगाकर श्री सूक्त का पाठ करें।

दीपावली की रात्रि में माता लक्ष्मी के साथ-साथ भगवान गणेश और सरस्वती माता का पूजन भी अवश्य करें। विद्या और विवेक के बिना धन विनाशकारी बन जाता है, अतः लक्ष्मी के साथ सद्बुद्धि की प्रार्थना अनिवार्य है।

5. तिजोरी एवं धन स्थान प्रतिष्ठा के नियम

पूजन के पश्चात 5 पीली कौड़ियां, 5 गोमती चक्र, 1 कमलगट्टा और 1 चांदी का सिक्का लाल रेशमी वस्त्र में बांधकर अपनी व्यापारिक गद्दी अथवा गृह की तिजोरी में रखें। इसे वर्ष भर न हटाएं।

शास्त्रोक्त अनुष्ठान सामग्री प्रामाणिक स्रोत • गीताप्रेस गोरखपुर

इस अनुष्ठान एवं दैनिक साधना हेतु आवश्यक प्रामाणिक सामग्री

कर्मकांडी आचार्यों के परामर्श अनुसार पूजा-पाठ में केवल शुद्ध धातु के पात्र एवं प्रामाणिक धर्मग्रंथों का ही उपयोग करना चाहिए:

★ 4.9 • गीताप्रेस गोरखपुर
श्रीमद्भगवद्गीता (साधक संजीवनी)
स्वामी रामसुखदास जी टीका (₹450)
अमेज़न पर देखें ↗
★ 4.8 • हरिद्वार प्रमाणित
5-मुखी रुद्राक्ष जाप माला
108+1 मनके वैदिक जाप हेतु (₹499)
अमेज़न पर देखें ↗
शुद्ध पीतल पंचमुखी दीपक, हवन पात्र एवं गंगाजल संग्रह देखें। संपूर्ण पूजा सामग्री भंडार देखें →
पंडित दर्शन - सनातन ज्ञान केंद्र

यदि आपको यह विधि या लेख उपयोगी लगा हो, तो अपने परिजनों व मित्रों के साथ साझा करें।

📲 परिजनों को शेयर करें

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *