त्वरित दर्शन (संक्षिप्त उत्तर)
वर्ष 2026 में नरक चतुर्दशी (छोटी दीपावली / रूप चौदस) का पावन पर्व रविवार, 8 नवंबर 2026 को मनाया जाएगा। अत्यंत दुर्लभ खगोलीय संयोग के अनुसार वर्ष 2026 में चतुर्दशी तिथि का अरुणोदय व्यापिनी काल एवं अमावस्या की प्रदोष व्यापिनी महालक्ष्मी पूजा दोनों 8 नवंबर 2026 को ही संपन्न होंगी। नरक चतुर्दशी पर अभ्यंग स्नान का सर्वश्रेष्ठ शास्त्रोक्त मुहूर्त प्रातः 05:08 बजे से प्रातः 06:38 बजे तक (अवधि: 1 घंटा 30 मिनट) रहेगा। इस दिन प्रदोष काल में अकाल मृत्यु निवारणार्थ 14 दीपों का यम दीपदान किया जाता है।
1. नरक चतुर्दशी 2026 पंचांग एवं अभ्यंग स्नान मुहूर्त सारणी
निर्णयसिंधु एवं धर्मसिंधु के अनुसार, नरक चतुर्दशी का अभ्यंग स्नान सदैव चंद्रोदय व्यापिनी अथवा अरुणोदय काल वाली चतुर्दशी को किया जाता है।
| पंचांग घटक (Panchang Element) | विवरण (वर्ष 2026) | शास्त्रीय संदर्भ / टिप्पणी |
|---|---|---|
| पर्व की तिथि | 8 नवंबर 2026, रविवार | कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी |
| चतुर्दशी तिथि प्रारंभ | 7 नवंबर 2026, दोपहर 02:48 बजे | पंचांग गणना आरंभ |
| चतुर्दशी तिथि समाप्त | 8 नवंबर 2026, दोपहर 12:44 बजे | इसके पश्चात अमावस्या तिथि आरंभ होगी |
| अभ्यंग स्नान शुभ मुहूर्त | प्रातः 05:08 से प्रातः 06:38 बजे तक | अरुणोदय काल (1 घंटा 30 मिनट) |
| चंद्रोदय समय (अभ्यंग काल) | प्रातः 05:14 बजे (दिल्ली) | चंद्रमा की किरणों की उपस्थिति में स्नान |
| यम दीपदान समय (14 दीप) | शाम 05:32 से शाम 07:10 बजे तक | प्रदोष काल में घर के चारों ओर दीप प्रज्वलन |
“वर्ष 2026 में 8 नवंबर को ही प्रातःकाल रूप चौदस का अभ्यंग स्नान होगा और उसी दिन सायंकाल अमावस्या लगने के कारण दीपावली का महालक्ष्मी पूजन होगा। शास्त्रों का अकाट्य नियम है—’तैलमर्दन’ (तिल के तेल से मालिश) केवल सूर्योदय से पूर्व अरुणोदय काल में ही पुण्य फलदायी होता है। सूर्योदय के पश्चात तेल लगाना निषेध है। स्नान के जल में अपामार्ग (चिरचिटा) के पत्ते अवश्य प्रवाहित करें।”
2. अभ्यंग स्नान एवं रूप निखार की शास्त्रोक्त विधि (Roop Chaudas Ubtan)
शास्त्रों में कहा गया है कि नरक चतुर्दशी के दिन समस्त जलों में मां गंगा और सभी तैल में माता लक्ष्मी का वास होता है:
ॐ अश्वत्थे वो निषदनं पर्णे वो वसतिष्कृता।
गोभाज इत् किलासथ यत्सनवथ पूरुषम्॥
त्रि-चरणीय अभ्यंग स्नान विधि:
- उबटन निर्माण: शुद्ध जौ का आटा, बेसन, हल्दी, केसर, चंदन और चमेली का तेल मिलाकर सात्विक उबटन बनाएं।
- तैल मर्दन: शरीर पर गुनगुने तिल के तेल की मालिश करें, जिससे वात दोष शांत होता है और त्वचा में तेज आता है।
- अपामार्ग प्रदक्षिणा: सिर के ऊपर से अपामार्ग (चिरचिटा) के पौधे को 7 बार घुमाकर दक्षिण दिशा की ओर फेंकें और कहें:
- अपामार्ग मार्जन मंत्र:
*शीतालोष्ठसमायुक्त सकंटकदलान्वित। हर पापमपामार्ग भ्राम्यमाणः पुनः पुनः॥*
(हे अपामार्ग! आप मेरे समस्त शारीरिक एवं मानसिक पापों का हरण करें।)
3. नरक चतुर्दशी पर 14 दीपकों का रहस्य एवं यम तर्पण
सायंकाल के समय यमराज के 14 नामों का स्मरण करते हुए घर के 14 प्रमुख स्थानों पर चौमुखी या एकमुखी दीप प्रज्वलित किए जाते हैं:
| दीप क्रम | प्रज्वलन स्थान | यमराज का पावन नाम | अभीष्ट फल |
|---|---|---|---|
| 1 | मुख्य द्वार की देहरी | ॐ यमाय नमः | अकाल मृत्यु निवारण |
| 2 | गृह का ईशान कोण | ॐ धर्मराजाय नमः | धर्म वृद्धि एवं शुचिता |
| 3 | तुलसी चौराहा | ॐ मृत्यवे नमः | दीर्घायुष्य एवं स्वास्थ्य |
| 4 | भंडार गृह (रसोई) | ॐ अंतकाय नमः | अन्न-पूर्णा कृपा |
| 5 | जल स्रोत (नल/कुआं) | ॐ वैवस्वताय नमः | पितृ तृप्ति |
| 6 | देव वेदी (पूजा घर) | ॐ कालाय नमः | संकट मोचन |
| 7 | शयन कक्ष | ॐ सर्वभूतक्षयाय नमः | दुःस्वप्न नाश |
| 8-14 | आंगन, छत, चारों दिशाएं | ॐ औदुंबराय, नीलाय, परमेष्ठिने नमः | कुल की रक्षा |
पूजा सामग्री की सूची के लिए पंडितदर्शन प्रामाणिक पूजा सामग्री तालिका देखें। दीपदान के उपरांत यमराज जी एवं भगवान शिव की पावन आरती का सस्वर पाठ करें।
4. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQPage Schema)
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“name”: “नरक चतुर्दशी के दिन 14 दीपक क्यों जलाए जाते हैं?”,
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इस अनुष्ठान एवं दैनिक साधना हेतु आवश्यक प्रामाणिक सामग्री
कर्मकांडी आचार्यों के परामर्श अनुसार पूजा-पाठ में केवल शुद्ध धातु के पात्र एवं प्रामाणिक धर्मग्रंथों का ही उपयोग करना चाहिए:
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