त्वरित दर्शन (संक्षिप्त उत्तर)
वर्ष 2026 में दीपावली का महापर्व रविवार, 8 नवंबर 2026 को मनाया जाएगा। कार्तिक मास की अमावस्या तिथि का प्रारंभ 8 नवंबर 2026 को दोपहर 12:44 बजे से होकर 9 नवंबर 2026 को प्रातः 10:32 बजे तक रहेगा। दीपावली पर महालक्ष्मी पूजन का सर्वश्रेष्ठ स्थिर वृषभ लग्न मुहूर्त शाम 05:38 बजे से शाम 07:34 बजे तक (अवधि: 1 घंटा 56 मिनट) रहेगा। इसके अतिरिक्त मध्यरात्रि में तांत्रिक एवं साधकों हेतु महानिशीथ काल (स्थिर सिंह लग्न) मुहूर्त रात्रि 12:08 बजे से 02:24 बजे तक रहेगा।
1. दीपावली 2026 पंचांग एवं स्थिर लग्न मुहूर्त सारणी (Lagna Muhurat)
महालक्ष्मी पूजन में ‘स्थिर लग्न’ का सर्वाधिक महत्व है ताकि लक्ष्मी जी का घर में सदा के लिए स्थिर वास हो:
| मुहूर्त घटक (Muhurat Component) | समय (8 नवंबर 2026, रविवार) | शास्त्रीय महात्म्य |
|---|---|---|
| अमावस्या तिथि प्रारंभ | दोपहर 12:44 बजे | लक्ष्मी आवाहन काल आरंभ |
| अमावस्या तिथि समाप्त | 9 नवंबर 2026, प्रातः 10:32 बजे | प्रातः स्नान-दान काल |
| प्रदोष काल मुहूर्त | शाम 05:32 से रात्रि 08:09 बजे तक | गृहस्थों हेतु अति उत्तम |
| स्थिर वृषभ लग्न (गृहस्थ एवं व्यापारी) | शाम 05:38 से शाम 07:34 बजे तक | स्थिर लक्ष्मी वास (सर्वोत्तम) |
| अमृत चौघड़िया मुहूर्त | शाम 05:32 से शाम 07:10 बजे तक | सुख-शांति व समृद्धि प्रदाता |
| निशीथ काल (मध्यरात्रि) | रात्रि 11:39 से 12:32 बजे तक | श्रीयंत्र व कुबेर साधना |
| स्थिर सिंह लग्न (महानिशीथ काल) | रात्रि 12:08 से 02:24 बजे तक | तांत्रिक एवं व्यापारिक सिद्धि योग |
“दीपावली पूजन में चल लग्न (मेष, कर्क, तुला, मकर) का पूर्ण त्याग करें। वृषभ लग्न (शाम 05:38 से 07:34) गृहस्थों और व्यापारियों के लिए अमृततुल्य है। पूजा वेदी पर लक्ष्मी जी के बाईं ओर भगवान गणेश और दाईं ओर भगवान विष्णु या सरस्वती जी को स्थापित करें। मिट्टी के नए दीपकों को कम से कम 2 घंटे पूर्व जल में भिगोकर सुखा लें ताकि वे तेल न सोखें।”
2. महालक्ष्मी षोडशोपचार पूजन एवं मंत्र विधान
दीपावली की रात्रि में भगवती महालक्ष्मी का ध्यान इस सिद्ध मंत्र से करें:
ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद।
श्रीं ह्रीं श्रीं ॐ महालक्ष्म्यै नमः॥
बहीखाता एवं कलम-दवात पूजन:
व्यापारी वर्ग अपनी नई बहीखाता (लेजर), लैपटॉप, तराजू और तिजोरी पर कुंकुम से स्वस्तिक बनाएं और ‘श्रीदत्त’ अथवा ‘लाभ-शुभ’ अंकित करें।
कुबेर देव का आवाह्न मंत्र:
ॐ यक्षाय कुबेराय वैश्रवणाय धनधान्याधिपतये।
धनधान्यसमृद्धिं मे देहि दापय स्वाहा॥
पूजा के उपरांत महालक्ष्मी जी की पावन आरती: ॐ जय लक्ष्मी माता का सपरिवार गान करें। संपूर्ण पूजन सामग्री सूची पंडितदर्शन सामग्री तालिका पर उपलब्ध है।
3. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQPage Schema)
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