त्वरित दर्शन (संक्षिप्त उत्तर)
वर्ष 2026 में तुलसी विवाह का पावन अनुष्ठान शनिवार, 21 नवंबर 2026 (कार्तिक शुक्ल द्वादशी) को संपन्न किया जाएगा। तुलसी विवाह का सर्वश्रेष्ठ गोधूलि लग्न मुहूर्त शाम 05:25 बजे से शाम 07:05 बजे तक रहेगा। पद्म पुराण के अनुसार जिस घर में तुलसी विवाह विधिवत कराया जाता है, उस परिवार को कन्यादान का परम पुण्य फल प्राप्त होता है और दांपत्य जीवन के समस्त कलह समाप्त होते हैं।
1. तुलसी विवाह 2026 पंचांग एवं विवाह मुहूर्त सारणी
| मुहूर्त घटक (Muhurat Component) | समय (21 नवंबर 2026, शनिवार) | शास्त्रीय संदर्भ |
|---|---|---|
| कार्तिक शुक्ल द्वादशी प्रारंभ | 20 नवंबर 2026, सायं 04:58 बजे | एकादशी के उपरांत |
| द्वादशी तिथि समाप्त | 21 नवंबर 2026, दोपहर 03:16 बजे | इसके पश्चात त्रयोदशी |
| तुलसी विवाह गोधूलि मुहूर्त (सर्वोत्तम) | शाम 05:25 से शाम 07:05 बजे तक | सांध्य वेला में लग्न वेदी |
| अमृत चौघड़िया मुहूर्त | शाम 05:25 से शाम 07:04 बजे तक | अखंड सौभाग्य प्रदाता |
“तुलसी विवाह में तुलसी के गमले को गेरू से सजाकर उसके चारों ओर गन्ने का मंडप बनाएं। तुलसी जी को लाल चुनरी, सिंदूर, बिंदी और 16 श्रृंगार अर्पित करें। शालिग्राम शिला पर पीला वस्त्र ओढ़ाएं और दोनों के मध्य पीला धागा (मौली) 7 बार लपेटकर गठबंधन करें।”
2. तुलसी विवाह मंगलाष्टक एवं कन्यादान संकल्प मंत्र
तुलसी श्रीर्महालक्ष्मीर्विद्याविद्या यशस्विनी। धर्म्या धर्मानना देवी देवीदेवमनःप्रिया॥
लभते सुतरां भक्तिमन्ते विष्णुपदं लभेत्। तुलसी भूर्महालक्ष्मीः पद्मिनी श्रीर्हरिप्रिया॥
पूजा सामग्री के लिए पंडितदर्शन सामग्री पृष्ठ देखें तथा विवाह उपरांत तुलसी माता की पावन आरती करें।
3. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQPage Schema)
{
“@context”: “https://schema.org”,
“@type”: “FAQPage”,
“mainEntity”: [
{
“@type”: “Question”,
“name”: “तुलसी विवाह 2026 में किस दिन होगा?”,
“acceptedAnswer”: {
“@type”: “Answer”,
“text”: “तुलसी विवाह शनिवार, 21 नवंबर 2026 को कार्तिक शुक्ल द्वादशी के दिन गोधूलि वेला में संपन्न किया जाएगा।”
}
},
{
“@type”: “Question”,
“name”: “तुलसी विवाह कराने से क्या फल मिलता है?”,
“acceptedAnswer”: {
“@type”: “Answer”,
“text”: “तुलसी विवाह कराने से निसंतान को संतान तथा कन्यादान के समान महापुण्य की प्राप्ति होती है और कुल में सुख-समृद्धि का वास होता है।”
}
}
]
}
इस अनुष्ठान एवं दैनिक साधना हेतु आवश्यक प्रामाणिक सामग्री
कर्मकांडी आचार्यों के परामर्श अनुसार पूजा-पाठ में केवल शुद्ध धातु के पात्र एवं प्रामाणिक धर्मग्रंथों का ही उपयोग करना चाहिए:
प्रातिक्रिया दे