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देवउठनी एकादशी 2026: प्रबोधिनी व्रत, चतुर्मास समाप्ति, विष्णु जागरण विधि एवं गन्ने का मंडप

✍️ लेखक: पंडित शिवम तिवारी
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देवउठनी एकादशी 2026 • प्रबोधिनी व्रत, विष्णु जागरण एवं पारण मुहूर्त

त्वरित दर्शन (संक्षिप्त उत्तर)

वर्ष 2026 में देवउठनी एकादशी (प्रबोधिनी एकादशी / देवोत्थान) का पावन व्रत शुक्रवार, 20 नवंबर 2026 को रखा जाएगा। इस पावन तिथि पर क्षीरसागर में 4 माह की योगनिद्रा में लीन भगवान श्रीहरि विष्णु जाग्रत होते हैं और इसके साथ ही चातुर्मास समाप्त होकर विवाह, गृहप्रवेश, मुंडन आदि समस्त मांगलिक कार्य प्रारंभ हो जाते हैं। देव जागरण एवं पूजा का श्रेष्ठ मुहूर्त 20 नवंबर की शाम 05:26 बजे से रात्रि 08:44 बजे तक रहेगा। व्रत के पारण का समय शनिवार, 21 नवंबर 2026 को प्रातः 06:49 बजे से 08:58 बजे तक रहेगा।

1. देवउठनी एकादशी 2026 पंचांग एवं पारण समय सारणी

पंचांग घटक (Panchang Element) विवरण (वर्ष 2026) शास्त्रीय संदर्भ
एकादशी तिथि प्रारंभ 19 नवंबर 2026, सायं 06:42 बजे दशमी विद्धा से मुक्त
एकादशी तिथि समाप्त 20 नवंबर 2026, सायं 04:58 बजे उदयकालिक शुद्ध एकादशी
विष्णु जागरण पूजा मुहूर्त 20 नवंबर, शाम 05:26 से 08:44 बजे तक प्रदोष काल गोधूलि वेला
द्वादशी पारण समय (सर्वोत्तम) 21 नवंबर, प्रातः 06:49 से प्रातः 08:58 बजे तक हरि वासर समाप्त होने के बाद
पंडित शिवम तिवारी का शास्त्रीय परामर्श:
“देवउठनी एकादशी की शाम को घर के आंगन में गेरू और चूने से भगवान के चरण-चिह्न (पगल्या) बनाएं जो बाहर से अंदर की ओर आते हों। गन्ने का चार खंभों वाला मंडप बनाकर उसमें शालिग्राम जी और तुलसी माता को विराजमान करें। शंख और घंटी बजाते हुए ‘उठो देवा, बैठो देवा’ का उच्च स्वर में गान करें।”

2. श्रीहरि विष्णु जागरण सिद्ध मंत्र

उत्तिष्ठोत्तिष्ठ गोविन्द उत्तिष्ठ गरुड़ध्वज। उत्तिष्ठ कमलाकान्त त्रैलोक्यं मङ्गलं कुरु॥

इयं तु द्वादशी देव प्रबोधाय विनिर्मिता। त्वयैव सर्वलोकानां हितार्थं शेषशायिना॥

3. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQPage Schema)

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शास्त्रोक्त अनुष्ठान सामग्री प्रामाणिक स्रोत • गीताप्रेस गोरखपुर

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