त्वरित दर्शन (संक्षिप्त परिचय)
दीपावली महापर्व का प्रथम और अत्यंत पावन दिन धनतेरस (धनत्रयोदशी) शुक्रवार, 6 नवंबर 2026 को पूरे देश में श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जाएगा। कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि का प्रारंभ 5 नवंबर 2026 की रात्रि 10:36 बजे से होकर 6 नवंबर 2026 की रात्रि 08:42 बजे तक रहेगा।
उदयातिथि और प्रदोष व्यापिनी त्रयोदशी के अनुसार, धनतेरस पर धन्वंतरि एवं कुबेर पूजन का सर्वश्रेष्ठ शुभ मुहूर्त 6 नवंबर की शाम 05:32 बजे से शाम 07:18 बजे तक (अवधि: 1 घंटा 46 मिनट) रहेगा। वहीं सोना, चांदी, नए बर्तन, वाहन और गृह सामग्री खरीदने का सर्वश्रेष्ठ अमृत चौघड़िया मुहूर्त प्रातः 06:38 से 08:02 बजे तक तथा शाम को 04:10 से 05:32 बजे तक रहेगा।
1. धनतेरस 2026 पंचांग एवं खरीदारी के सर्वश्रेष्ठ चौघड़िया मुहूर्त (Shopping Muhurat)
स्कंद पुराण के अनुसार, समुद्र मंथन के समय इसी पावन तिथि पर आयुर्वेद के जनक भगवान धन्वंतरि अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे। इस दिन धातु (विशेषकर पीतल, चांदी और सोना) खरीदना 13 गुना समृद्धि कारक माना जाता है।
| पंचांग घटक (Panchang Element) | समय एवं अवधि (6 नवंबर 2026) | शास्त्रीय शुभता / फल |
|---|---|---|
| त्रयोदशी तिथि प्रारंभ | 5 नवंबर 2026, रात्रि 10:36 बजे | पंचांग गणना आरंभ |
| त्रयोदशी तिथि समाप्त | 6 नवंबर 2026, रात्रि 08:42 बजे | इसके पश्चात चतुर्दशी तिथि लगेगी |
| धन्वंतरि व कुबेर पूजा मुहूर्त | शाम 05:32 से शाम 07:18 बजे तक | प्रदोष काल एवं स्थिर वृषभ लग्न (अति शुभ) |
| प्रातःकालीन खरीदारी मुहूर्त (चर व लाभ) | प्रातः 06:38 से प्रातः 09:24 बजे तक | व्यवसाय, वाहन व बहीखाता क्रय हेतु |
| अमृत चौघड़िया (सर्वश्रेष्ठ खरीदारी काल) | दोपहर 12:08 से दोपहर 01:32 बजे तक | सोना, चांदी, आभूषण व भूमि निवेश |
| सायंकालीन खरीदारी मुहूर्त (शुभ चौघड़िया) | शाम 04:10 से शाम 05:32 बजे तक | पीतल के बर्तन, धनिया, झाड़ू व इलेक्ट्रॉनिक सामान |
| राहुकाल (खरीदारी में वर्जित समय) | प्रातः 10:48 से दोपहर 12:12 बजे तक | इस समय कोई भी खरीदारी या निवेश न करें |
“धनतेरस पर बर्तन खरीदते समय लोग प्रायः स्टील या एल्युमिनियम खरीद लेते हैं। ध्यान रहे कि समुद्र मंथन में भगवान धन्वंतरि पीतल का कलश लेकर प्रकट हुए थे, इसलिए पीतल (Brass) उनकी प्रिय धातु है। यदि आप सोना या चांदी लेने में असमर्थ हैं, तो पीतल का एक छोटा सा पात्र (जैसे कलश या थाली) अवश्य खरीदें। इसके अलावा ₹10 का साबुत धनिया और एक नई सींक वाली झाड़ू खरीदना साक्षात माता महालक्ष्मी के घर प्रवेश का प्रतीक है। खरीदे गए बर्तनों को कभी भी खाली घर न लाएं; उनमें थोड़ा सा चावल, बताशा या जल भरकर ही मुख्य द्वार से गृह प्रवेश कराएं।”
2. धनतेरस पर क्या खरीदें और क्या कदापि न खरीदें? (Auspicious Purchases)
अवश्य खरीदने योग्य मंगल वस्तुएं:
- पीतल के बर्तन: भगवान धन्वंतरि का प्रिय धातु।
- सोना अथवा चांदी के सिक्के: जिन पर माता लक्ष्मी और भगवान गणेश का चित्र अंकित हो।
- साबुत धनिया (धनिया के बीज): धनतेरस पर धनिया खरीदकर पूजा में रखें, फिर दीपावली के बाद इसे गमले में बोएं। यह समृद्धि का सूचक है।
- नई झाड़ू: झाड़ू को माता लक्ष्मी का स्वरूप माना जाता है, यह घर से दरिद्रता का निष्कासन करती है।
- मिट्टी के दीपक एवं श्रीयंत्र: दीपावली की मुख्य पूजा हेतु नए मिट्टी के दीए।
भूलकर भी न खरीदें (अशुभ वस्तुएं):
- लोहा या लोहे से बनी वस्तुएं: लोहे पर शनि और राहु का प्रभाव होता है; धनतेरस पर धारदार वस्तुएं (कैंची, चाकू) न लाएं।
- एल्युमिनियम और प्लास्टिक: एल्युमिनियम राहु का कारक माना जाता है।
- कांच के बर्तन: कांच का संबंध राहु और केतु से है, यह पारिवारिक कलह का कारण बनता है।
- काले रंग के वस्त्र या वस्तुएं: धनतेरस के दिन काला रंग वर्जित माना गया है।
3. भगवान धन्वंतरि एवं कुबेर षोडशोपचार पूजा विधि (Puja Vidhi)
शाम के प्रदोष काल मुहूर्त (05:32 से 07:18 बजे) में घर के ईशान कोण में पूजा चौकी स्थापित करें।
पूजन के चरण:
- कलश स्थापना: लकड़ी की चौकी पर लाल वस्त्र बिछाएं। एक तांबे या पीतल के लोटे में गंगाजल भरकर उस पर आम के पत्ते और नारियल रखें।
- धन्वंतरि व कुबेर स्थापना: चौकी पर भगवान धन्वंतरि, कुबेर देव और माता महालक्ष्मी की मूर्ति/चित्र स्थापित करें।
- भगवान धन्वंतरि का वैदिक मंत्र:
$$text{ॐ नमो भगवते महासुदर्शनाय वासुदेवाय धन्वंतराये अमृतकलशहस्ताय,}$$ $$text{सर्वभयविनाशाय सर्वरोगनिवारणाय त्रिलोकपतये त्रिलोकनाथाय श्री महाविष्णुस्वरूपाय नमः॥}$$
- कुबेर मंत्र साधना: हाथ में अक्षत और पुष्प लेकर तिजोरी या उत्तर दिशा की ओर मुख करके कुबेर देव का ध्यान करें:
$$text{ॐ यक्षाय कुबेराय वैश्रवणाय धनधान्याधिपतये,}$$ $$text{धनधान्यसमृद्धिं मे देहि दापय स्वाहा॥}$$
- औषधि अर्पण: भगवान धन्वंतरि को तुलसी दल, आंवला और मौसमी फलों के साथ कोई एक शुद्ध आयुर्वेदिक औषधि (जैसे गिलोय या हरड़) अर्पित करें।
4. यम दीपदान: दक्षिण दिशा में चौमुखा दीपक का अचूक विधान (Yam Deepdan)
पद्म पुराण के अनुसार, धनतेरस की रात्रि में घर के बाहर दक्षिण दिशा में यमराज के निमित्त दीपदान करने से परिवार के किसी भी सदस्य की अकाल मृत्यु (Unnatural Death) से रक्षा होती है।
यम दीपदान के अनिवार्य नियम:
- दीपक का स्वरूप: मिट्टी या आटे का एक बड़ा चौमुखा दीपक बनाएं।
- बत्ती एवं तेल: इसमें चार बत्तियां (कपास या कलावा) लगाएं और शुद्ध तिल का तेल या सरसों का तेल भरें।
- कौड़ी व सिक्का: दीपक के अंदर एक तांबे का सिक्का और एक पीली कौड़ी अवश्य डालें।
- रखने की दिशा: परिवार के सभी सदस्यों के हाथ-मुंह धोने के उपरांत, घर के मुख्य द्वार के बाहर दक्षिण दिशा की ओर मुख करके यह दीपक रखें।
- यम दीपदान मंत्र:
$$text{मृत्युना पाशदण्डाभ्यां कालेन श्यामया सह।}$$ $$text{त्रयोदश्यां दीपदानात् सूर्यजः प्रीयतां मम॥}$$ (हे सूर्यपुत्र यमराज! अपनी शक्ति, पाश और काल के साथ आप इस दीपक से प्रसन्न हों और हमारे कुल की अकाल मृत्यु से रक्षा करें।)
- दीपक रखकर मुड़कर न देखें: दीप प्रज्वलित करने के बाद पीछे मुड़कर न देखें और सीधे घर के अंदर आ जाएं।
5. तेरह दीपकों का विधान (13 Sacred Lamps)
धनतेरस की रात्रि में घर के विभिन्न कोष्ठकों में 13 दीपक जलाने का शास्त्रोक्त विधान है:
- पहला दीपक: यमराज के लिए घर के बाहर दक्षिण दिशा में।
- दूसरा दीपक: पूजा घर में अखंड ज्योति के रूप में।
- तीसरा दीपक: तुलसी जी के चौबारे में।
- चौथा दीपक: घर के मुख्य प्रवेश द्वार के दोनों ओर।
- पांचवां दीपक: रसोई घर में जल के पात्र (पीने के पानी) के पास।
- छठा दीपक: छत पर आकाश दीप के रूप में।
- सातवां से तेरहवां दीपक: तिजोरी के पास, अन्न के भंडार में, और घर के सभी कोनों में।
6. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्र. 1: धनतेरस 2026 में सोना और बर्तन खरीदने का सबसे अच्छा समय क्या है? उत्तर: धनतेरस 6 नवंबर 2026 को खरीदारी का सर्वश्रेष्ठ अमृत चौघड़िया मुहूर्त दोपहर 12:08 से 01:32 बजे तक और शाम को 04:10 से 05:32 बजे तक रहेगा।
प्र. 2: यम का दीपक किस समय और किस दिशा में जलाना चाहिए? उत्तर: यम दीपदान सूर्यास्त के बाद प्रदोष काल में (शाम 05:32 बजे के बाद) किया जाता है। इसे घर के मुख्य द्वार के बाहर दक्षिण दिशा की ओर मुख करके रखा जाता है।
प्र. 3: क्या धनतेरस पर स्टील के बर्तन खरीदने चाहिए? उत्तर: नहीं, स्टील राहु का कारक माना जाता है। धनतेरस पर शुद्ध पीतल, तांबा, चांदी या मिट्टी के बर्तन खरीदना ही शास्त्रसम्मत और शुभ फलदायी है।
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कर्मकांडी आचार्यों के परामर्श अनुसार पूजा-पाठ में केवल शुद्ध धातु के पात्र एवं प्रामाणिक धर्मग्रंथों का ही उपयोग करना चाहिए:
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