ॐ जय शिव ओंकारा, शंकर जी की आरती
सोमवार का दिन हो, शिवरात्रि हो, या सावन का महीना, यह आरती हर शिव मंदिर में गूंजती है। बचपन से हम इसे मंदिर में सुनते आए हैं, घंटियों की आवाज़ के साथ। इसके बोल इतने सरल और मधुर हैं कि एक बार सुनने पर ही याद हो जाते हैं।
आरती के बोल
हिंदी
ॐ जय शिव ओंकारा, स्वामी जय शिव ओंकारा।
ब्रह्मा विष्णु सदाशिव, अर्धांगी धारा॥
ॐ जय शिव ओंकारा…
एकानन चतुरानन पंचानन राजे।
हंसासन गरुड़ासन वृषवाहन साजे॥
ॐ जय शिव ओंकारा…
दो भुज चार चतुर्भुज दसभुज अति सोहे।
त्रिगुण रूप निरखता त्रिभुवन जन मोहे॥
ॐ जय शिव ओंकारा…
अक्षमाला वनमाला मुण्डमाला धारी।
त्रिपुरारी कंसारी कर माला धारी॥
ॐ जय शिव ओंकारा…
श्वेताम्बर पीताम्बर बाघम्बर अंगे।
सनकादिक गरुणादिक भूतादिक संगे॥
ॐ जय शिव ओंकारा…
कर के मध्य कमंडल चक्र त्रिशूलधारी।
सुखकारी दुखहारी जगपालनकारी॥
ॐ जय शिव ओंकारा…
काशी में विश्वनाथ विराजत नंदी ब्रह्मचारी।
नित उठि भोग लगावत महिमा अति भारी॥
ॐ जय शिव ओंकारा, स्वामी जय शिव ओंकारा।
Transliteration
Om Jai Shiv Omkara, Swami Jai Shiv Omkara.
Brahma Vishnu Sadashiv, Ardhangi Dhara.
Om Jai Shiv Omkara…
Ekanan Chaturanan Panchanan Raje.
Hansasan Garudasan Vrishavahan Saje.
Om Jai Shiv Omkara…
Do Bhuj Char Chaturbhuj Dasbhuj Ati Sohe.
Trigun Roop Nirakhata Tribhuvan Jan Mohe.
Om Jai Shiv Omkara…
Akshamala Vanmala Mundamala Dhari.
Tripurari Kansari Kar Mala Dhari.
Om Jai Shiv Omkara…
Shwetambar Pitambar Baghambar Ange.
Sanakadik Garunadik Bhootadik Sange.
Om Jai Shiv Omkara…
Kar Ke Madhya Kamandal Chakra Trishuldhari.
Sukhkari Dukhhari Jagpalankari.
Om Jai Shiv Omkara…
Kashi Mein Vishwanath Virajat Nandi Brahmachari.
Nit Uthi Bhog Lagawat Mahima Ati Bhari.
Om Jai Shiv Omkara, Swami Jai Shiv Omkara.
अर्थ और भाव
इस आरती में भगवान शिव के विराट रूप का वर्णन है। कहा गया है कि ब्रह्मा, विष्णु और स्वयं शिव, तीनों एक ही सत्य के अलग-अलग रूप हैं। शिव जी कभी एक मुख वाले, कभी चार मुख वाले, तो कभी पांच मुख वाले रूप में विराजते हैं। वे कमंडल, चक्र और त्रिशूल धारण करते हैं, और सुख देने वाले, दुख हरने वाले तथा पूरे जगत का पालन करने वाले हैं। काशी में विश्वनाथ के रूप में उनका विशेष महिमामयी वास बताया गया है।
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