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शरद नवरात्रि पूजा विधि, नवदुर्गा और संपूर्ण विधि

✍️ लेखक: पंडित शिवम तिवारी
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शरद नवरात्रि पूजा विधि, नवदुर्गा और संपूर्ण विधि
🔱 माँ दुर्गा · नवरात्रि

शरद नवरात्रि पूजा विधि, नवदुर्गा और संपूर्ण विधि

पूजा विधि · नौ रातों का पर्व, माँ दुर्गा के नौ रूपों को समर्पित

साल में जब भी नवरात्रि की बात होती है, ज़्यादातर लोगों के मन में यही नवरात्रि आती है, शरद नवरात्रि। यह अश्विन महीने में आती है, और नौ रातों तक चलती है। हर रात माँ दुर्गा के एक अलग रूप की पूजा होती है, और दसवें दिन विजयादशमी यानी दशहरा मनाया जाता है। घर में कलश स्थापना से लेकर कन्या पूजन तक, हर दिन का अपना महत्व है।

माँ दुर्गा

नवदुर्गा, नौ दिन नौ रूप

नवरात्रि के नौ दिनों में माँ दुर्गा के इन नौ रूपों की पूजा होती है, हर रूप का अपना अलग स्वभाव और आशीर्वाद है।

दिन 1

शैलपुत्री

पर्वतराज हिमालय की पुत्री, मूलाधार चक्र की देवी

दिन 2

ब्रह्मचारिणी

तपस्या और संयम की देवी

दिन 3

चंद्रघंटा

शौर्य और शांति दोनों की प्रतीक

दिन 4

कूष्मांडा

सृष्टि की रचयिता, सूर्य के भीतर निवास करने वाली

दिन 5

स्कंदमाता

भगवान कार्तिकेय (स्कंद) की माता

दिन 6

कात्यायनी

ऋषि कात्यायन के घर जन्मी, योद्धा रूप

दिन 7

कालरात्रि

अंधकार और बुराई का नाश करने वाली

दिन 8

महागौरी

शांति और करुणा की देवी, अष्टमी पूजा

दिन 9

सिद्धिदात्री

सभी सिद्धियां देने वाली, नवमी पूजा

पूजा से पहले की तैयारी

  • घर और पूजा स्थान को अच्छी तरह साफ करें, नवरात्रि शुरू होने से पहले।
  • प्रतिपदा तिथि को कलश स्थापना (घटस्थापना) सुबह के शुभ मुहूर्त में करें।
  • अगर व्रत रखना चाहें, तो नौ दिन या कम से कम पहले और आखिरी दिन का व्रत रखा जा सकता है।
  • माँ दुर्गा की मूर्ति या चित्र का मुख उत्तर या पूर्व दिशा में रखें।

घटस्थापना के लिए सामग्री

  • मिट्टी का पात्र या कलश, जौ बोने के लिए
  • साफ मिट्टी और जौ के बीज
  • तांबे या मिट्टी का कलश, जल भरने के लिए
  • आम के पत्ते, कलश के मुख पर रखने के लिए
  • नारियल, कलश के ऊपर रखने के लिए
  • लाल कपड़ा, कलश लपेटने के लिए
  • सुपारी, सिक्का, अक्षत, कलश में डालने के लिए
  • दुर्गा जी की मूर्ति या चित्र
  • लाल चुनरी और सिंदूर
  • अखंड ज्योति के लिए घी का दीपक, नौ दिन जलाने हेतु
  • फूल, धूप, नैवेद्य
कलश स्थापना

घटस्थापना विधि

  1. स्थान शुद्धि, पूजा स्थान को गंगाजल से शुद्ध करें।
  2. मिट्टी के पात्र में जौ बोएं, साफ मिट्टी बिछाकर उसमें जौ के बीज डालें।
  3. कलश तैयार करें, कलश में जल भरें, उसमें सुपारी, सिक्का और अक्षत डालें।
  4. आम के पत्ते और नारियल रखें, कलश के मुख पर आम के पत्ते रखें, ऊपर लाल कपड़े में लिपटा नारियल रखें।
  5. कलश स्थापना करें, तैयार कलश को जौ वाले पात्र के पास स्थापित करें।
  6. देवी का आवाहन करें, हाथ जोड़कर माँ दुर्गा का ध्यान करें और उन्हें आमंत्रित करें।
  7. अखंड ज्योति जलाएं, घी का दीपक जलाएं, इसे नौ दिन तक जलता रखने का प्रयास करें।
  8. संकल्प लें, नौ दिन पूजा और (यदि हो तो) व्रत का संकल्प लें।

रोज़ की पूजा विधि

  1. सुबह स्नान के बाद देवी को जल, फूल, अक्षत और सिंदूर अर्पित करें।
  2. उस दिन के स्वरूप का ध्यान करें और उनका मंत्र या स्तुति पढ़ें।
  3. धूप-दीप दिखाएं और भोग अर्पित करें।
  4. शाम को आरती करें, पूरे परिवार के साथ।
  5. अखंड ज्योति की देखभाल करें, ताकि वह बुझने न पाए।
दुर्गा आरती

अष्टमी और नवमी, कन्या पूजन

अष्टमी या नवमी के दिन (परिवार की परंपरा के अनुसार) कन्या पूजन किया जाता है। नौ छोटी कन्याओं को घर बुलाकर उनके पैर धोए जाते हैं, उन्हें भोजन कराया जाता है, और उपहार व दक्षिणा दी जाती है। इन्हें देवी का साक्षात रूप माना जाता है।

मंत्र

ॐ दुं दुर्गायै नमः दुर्गा बीज मंत्र, सरल और नियमित जाप के लिए उत्तम
सर्वमंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके। शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तु ते॥ दुर्गा स्तुति

ध्यान रखने योग्य बातें

  • अखंड ज्योति जलाई है तो उसे अकेला न छोड़ें, आग से जुड़ी सावधानी बरतें।
  • व्रत रख रहे हों तो शरीर के अनुसार सही आहार लें, स्वास्थ्य का ध्यान रखें।
  • घर में शांति और सात्विकता बनाए रखें, नौ दिन विशेष श्रद्धा के होते हैं।
महत्व: शरद नवरात्रि बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है। नौ दिन माँ दुर्गा की आराधना करने से शक्ति, साहस और सकारात्मक ऊर्जा मिलती है, और दसवें दिन दशहरा इसी विजय का उत्सव है।
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