भगवान शिव की पावन आरती ‘जय शिव ओंकारा’: संपूर्ण पद-पद का गूढ़ भावार्थ एवं आरती की शास्त्रीय विधि
॥ देवाधिदेव महादेव स्तुति • पावन आरती दर्शन ॥ सनातन धर्म में किसी भी पूजन, अनुष्ठान या संध्या वंदन की पूर्णता आरती के बिना अधूरी मानी जाती है। आरती का अर्थ ही है—’आ समंतात रतिः’ अर्थात् परमात्मा में संपूर्ण प्रेम और अनन्य अनुराग स्थापित होना। देवाधिदेव महादेव की सर्वाधिक प्रिय और सर्वव्यापी आरती ‘जय शिव […]